राजनांदगांव , शिक्षा और समाजसेवा से जुड़ा एक प्रेरक उदाहरण पेश करते हुए शहर के वरिष्ठ शिक्षाविद् नायर दंपत्ति ने मृत्यु उपरांत अपना शरीर चिकित्सा शिक्षा के लिए दान करने की घोषणा की है। राजनांदगांव निवासी एनजी नायर और उनकी पत्नी राजलक्ष्मी नायर ने शासकीय अटल बिहारी वाजपेयी चिकित्सा महाविद्यालय को देहदान का संकल्प पत्र सौंपा है।
युगांतर विद्यालय परिसर में निवासरत एन.जी. नायर ने वर्ष 1957 में शासकीय विज्ञान महाविद्यालय रायपुर से अपनी शासकीय सेवा शुरू की थी। सेवा के दौरान उन्होंने अंग्रेजी साहित्य में स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त की और लंबे समय तक विभिन्न महाविद्यालयों में कार्य किया। उनकी पत्नी राजलक्ष्मी नायर ने भी शासकीय विज्ञान महाविद्यालय रायपुर से अपने शैक्षणिक सेवा जीवन की शुरुआत की।
अविभाजित मध्यप्रदेश के शाजापुर, बालाघाट, सिवनी और राजनांदगांव सहित विभिन्न स्थानों में सेवाएं देने वाले इस दंपत्ति ने अपने कार्यकाल का लंबा समय दिग्विजय महाविद्यालय में बिताया। एन.जी. नायर ने कार्यालय अधीक्षक रहते हुए लगभग एक दशक तक अंग्रेजी साहित्य के विद्यार्थियों को निशुल्क मार्गदर्शन भी दिया। वे योग और हस्तरेखा विज्ञान के जानकार हैं
अध्ययन और प्रशिक्षण में सहायता मिलेगी: नायर दंपती का मानना है कि मृत्यु के बाद शरीर का सबसे सार्थक उपयोग चिकित्सा शिक्षा और शोध में हो सकता है। देहदान से मेडिकल विद्यार्थियों को अध्ययन और प्रशिक्षण में सहायता मिलती है। प्रगतिशील सोच रखने वाले नायर दंपती ने हमेशा शिक्षा और विद्यार्थियों के हित को प्राथमिकता दी है। वे युगांतर पब्लिक स्कूल के प्राचार्य मधुसूदन नायर के माता-पिता तथा गायत्री विद्यापीठ की पूर्व प्राचार्या शैलजा नायर के सास-ससुर हैं।
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