जबलपुर। बोर्ड परीक्षा के पैटर्न को लेकर विद्यार्थी उलझन में हैं। माध्यमिक शिक्षा मंडल ने जहां ब्लू प्रिंट के हिसाब से पेपर बेवसाइट में अपलोड किए है वहीं अर्द्धवार्षिक परीक्षा में पेपर पुराने पैटर्न के मुताबिक मिल रहे हैं। सभी स्कूलों में कुछ पेपर पैटर्न से बाहर आए जिस पर विद्यार्थियों ने अपत्ति दर्ज कराई लेकिन उन्हें समझाकर बात दबा दी गई है।
परीक्षा देकर स्कूल से लौट रहे दसवीं कक्षा के विद्यार्थियों का कहना था कि इंटरनेट मीडिया में बने समूह में कई विषयों के व्लू प्रिंट के हिसाब से भेजे गए थे। जिसके आधार पर परीक्षा की तैयारी की गई है लेकिन पेपर उसके मुताबिक नहीं आए है। परीक्षा में वो सवाल पूछे जा रहे हैं जिनकी आनलाइन पढ़ाई ही नहीं कराई गई है। इसको लेकर कुछ सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों ने विरोध भी जताया, लेकिन विद्यार्थियों को यह कहकर शांत कर दिया गया यह तो अर्द्धवार्षिक परीक्षा है इसमें परेशान होने की आवश्यक्त नहीं है।
माशिमं और डीपीआइ में फंसा पेंच : स्कूल शिक्षा विभाग और माध्यमिक शिक्षा मंडल के बीच समन्वय नहीं बनने के कारण ये समस्या आ रही है। दरअसल विगत 4 जनवरी को माध्यमिक शिक्षा मंडल बोर्ड की बैठक हुई। जिसमें अध्यक्ष राधेश्याम जुलानिया ने पैटर्न बदलने की सिफारिश की। बोर्ड बैठक में जबलपुर से भी कुछ सदस्य शामिल थे। उन्होंने नाम नहीं खोलने की शर्त पर बताया कि जुलानिया नया पैटर्न मौजूदा सत्र से लागू करने पर अडे रहे। जबकि 23 बोर्ड के सदस्यों में ज्यादातर इसे मौजूदा परिस्थितियों के हिसाब से व्यावहारिक नहीं मान रहे थे।
सदस्यों ने आगामी सत्र से इस पैटर्न पर विचार करने की बात कही लेकिन जुलानिया ने कहा कि चूंकि वो इस साल सेवानिवृत्त् हो रहे हैं इसलिए ये बदलाव चालू सत्र में ही लागू होगा। सदस्य की मानें तो कुछ विधायक सदस्यों ने तो कहा कि पैटर्न बदलने से जनता में नाराज होगी। वो अपने क्षेत्र के लोगों को क्या जवाब देगे। इतने सब के बावजूद माशिमं अध्यक्ष पैटर्न बदलने पर अडिग रहे। हालांकि सदस्यों ने कहा कि अब पुराने पैटर्न पर ही परीक्षा होना तय हो गया है। राज्य सरकार ने बदलाव को निरस्त कर दिया है इससे विद्यार्थियों को किसी तरह की परेशानी या उलझन नहीं होगी।
