राजनांदगाँव । कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट)के संरक्षक अनिल बरडिया , प्रदेश उपाध्यक्ष शरद अग्रवाल, प्रदेश मंत्री राजा माखीजा, जिलाध्यक्ष सूरज खंडेलवाल, महामंत्री हरीश मोटलानी, कोषाध्यक्ष अशोक मोदी, प्रवक्ता रेखचंद जैन ने बताया कि देश में कुछ बड़ी एवं प्रमुख ई कॉमर्स कंपनियों द्वारा भारत के ई कॉमर्स एवं रिटेल व्यापार में आर्थिक आतंकवाद जैसी गतिविधियों को लगातार जारी रखने के खिलाफ  कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ़  आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने आगामी 15 दिसंबर को रिटेल डेमोक्रोसी डे  के रूप में मनाये जाने की घोषणा की है और इस दिन देश के सभी राज्यों के अंतर्गत जिलों के डिस्ट्रिक्ट कलेक्टरों को स्थानीय व्यापारी संगठन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सम्बोधित एक ज्ञापन सौंपेंगे ! ज्ञापन में प्रधानमंत्री मोदी से आग्रह किया गया है की वो बहुत जल्द एक ई कॉमर्स पालिसी घोषित करें जिसमें एक सुदृढ़ एवं अधिकार संपन्न एक ई कॉमर्स रेगुलेटरी अथॉरिटी के गठंन तथा लोकल पर वोकल एवं आत्मनिर्भर भारत को अमलीजामा पहनाने के लिए देश भर में व्यापारियों एवं अधिकारियों की एक संयुक्त समिति केंद्रीय स्तर पर, राज्य स्तर पर एवं जिला स्तर गठित करें जिसमें सरकारी अधिकारी एवं व्यापारियों के प्रतिनिधियों को शामिल किया जाए !
 कैट के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अमर पारवानी ने बताया कि इसी कड़ी में कैट सी जी चैप्टर द्वारा प्रदेश में कैट के सभी जिला इकाईयों ने अपने जिलों के डिस्ट्रिक्ट कलेक्टरों एवम् एसडीएम को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के नाम से ज्ञापन सौपेगे! उन्होंने आगे कहा कि बड़ी विदेशी ई कॉमर्स कंपनियों ने अपने मनमाने रवैय्ये और सरकार की ई कॉमर्स पालिसी के प्रावधानों का लगातार घोर उल्लंघन किया है जिसमें विशेष रूप से लागत से भी कम मूल्य पर माल बेचना, भारी डिस्काउंट देना, पोर्टल पर बिकने वाले सामान की इन्वेंटरी पर नियंत्रण रखना, माल बेचने पर हुए नुकसान की भरपाई करना, विभिन्न ब्रांड कंपनियों से समझौता कर उनके उत्पाद एकल रूप से अपने पोर्टल पर बेचना आदि शामिल हैं जो स्पष्ट रूप से सरकार की एफडीआई पालिसी के प्रेस नोट 2 में बिलकुल प्रतिबंधित हैं लेकिन उसके बावजूद भी ये कंपनियां खुले रूप से यह माल बेच रही हैं जिससे भारत के ई कॉमर्स व्यापार में ही नहीं बल्कि रिटेल बाजार में असमान प्रतिस्पर्धा का वातावरण बना हुआ है जिसके चलते देश के छोटे व्यापारी जिनके साधन सीमित हैं, उनका व्यापार चलाना बेहद मुश्किल हो गया है
  पारवानी ने कहा की यदि यही स्थिति रही तो आने वाले समय में प्रदेश के 6 लाख व्यापारियों सहित देश के करोड़ों व्यापारियों को अपने व्यापार से हाथ धोना पड़ेगा और व्यापारियों के कर्मचारियों को बेरोजगारी का सामना करना पड़ेगा ! देश का रिटेल व्यापार वर्तमान में लगभग 950 बिलियन डॉलर वार्षिक का है जबकि रिटेल व्यापार में लगभग 45 करोड़ लोगों को रोजग़ार मिलता है और देश में कुल खपत में रिटेल बाजार का हिस्सा 40 प्रतिशत है ! इतने बड़े और विशाल भारतीय रिटेल बाजार पर कब्ज़ा जमाने के लिए विश्व भर की कंपनियों की नजर है और इसी छिपे उद्देश्य को लेकर ई कॉमर्स कंपनियां भारत में हर तरह का अनैतिक व्यापार करते हुए रिटेल बाजार पर अपना एकाधिकार स्थापित करना चाहती हैं और ईस्ट इंडिया कम्पनी का दूसरा संस्करण बनते हुए देश को आर्थिक गुलामी की तरफ ले जाना चाहती हैं !

पारवानी ने कहा की ये ई कॉमर्स कंपनियां अपने ई कॉमर्स पोर्टल पर विदेशी सामानों जिसमें ख़ास तौर पर चीनी  का सामान  अपने पोर्टल से धड़ले से बेच रही हैं और देश के ई कॉमर्स व्यापार के जरिये भारत के रिटेल बाजार पर एकाधिकार बनाते हुए देश के रिटेल बाजार पर अपना कब्ज़ा करेंगी ! ये कंपनियां भारत सरकार की एफडीआई रिटेल पालिसी सहित विभिन्न कानूनों को धता बताते हुए मनमाने तरीके से व्यापार कर रही हैं जिसके चलते प्रधानमंत्री मोदी द्वारा लोकल पर वोकल ‘ एवं आत्म निर्भर भारत के आव्हान का भी खुले रूप से मखौल उड़ा रही हैं ! इन कंपनियों के द्वारा ई कॉमर्स व्यापार को विषाक्त करने के बाद अब देश के व्यापारियों को ई कॉमर्स व्यापार अपनाने में बेहद कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है जो देश के आर्थिक भविष्य की नीवं को खोखला कर देगा, इसलिए इन कंपनियों पर सरकार का कानूनी चाबुक चलाना बेहद जरूरी है !

By kgnews

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