पिछले शुक्रवार को पीएम मोदी ने तीनों विवादस्पद कानून खत्म करने का बड़ा एलान किया। केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में भी तीनों कृषि कानूनों को रद्द करने के विधेयक को मंजूरी दे दी गई है। अब सोमवार से शुरू होने वाले संसद के शीतकालीन सत्र में पहले दिन ही इस विधेयक को पेश किया जाएगा। विधेयक पर संसद में बहस होगी और इसके बाद वोटिंग होगी। विधेयक पास होते ही तीनों कृषि कानून रद्द हो जाएंगे। लेकिन तीनों कृषि कानून रद्द किए जाने के सरकार के इन कदमों के बावजूद किसान अभी भी आंदोलन खत्म करने के पक्ष में नहीं है।
सिंघू, गाजीपुर और टिकरी बॉर्डरों पर इकट्ठा हैं किसान
किसानों का कहना है कि जब तक न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर गारंटी कानून नहीं बनाया जाता तब तक वे अपने घर जाने को तैयार नहीं है। संयुक्त किसान मोर्चा का कहना है कि बीते साल 26-27 नवंबर को ही दिल्ली चलो के आह्वान से यह आंदोलन शुरू हुआ था। ऐसे में किसान आंदोलन ने एक साल का ऐतिहासिक समय पूरा कर लिया है।
इस मौके पर शुक्रवार को पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के हजारों किसान बड़ी संख्या में सिंघू, गाजीपुर और टिकरी बॉर्डरों पर इकट्ठा हुए थे और वहां डटे हुए हैं। हालांकि सरकार ने एक बार फिर उनसे आंदोलन खत्म करने की अपील की है। कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि पीएम ने एमएसपी पर समिति बनाने की घोषणा की है। किसानों को अब आंदोलन खत्म कर देना चाहिए। सरकार ने पराली जलाने को अपराध की श्रेणी से बाहर करने की किसानों की मांग भी मान ली है।
