केतु को अशुभ ग्रह के रूप में देखा जाता है। लेकिन ऐसा नहीं है कि केतु हमेशा अशुभ फल ही देता है, बल्कि इसके शुभ-अशुभ परिणाम इसकी परिस्थिति पर आधारित होते हैं। यदि केतु देवगुरु बृहस्पति के साथ युति बनाता है तो यह जातक के लिए राजयोग होता है। कुंडली में केतु के बली होने से जातक के पैर मजबूत होते हैं जबकि अशुभ, पीड़ित या कमजोर होने पर व्यक्ति को पैरों में दर्द, कमजोरी की शिकायत बनी रहती है।
ज्योतिष में केतु को अध्यात्म, वैराग्य, मोक्ष, गूढ़ विज्ञान और तांत्रिक विद्या का कारक माना जाता है। वर्तमान में केतु ग्रह वृश्चिक राशि में स्थित है और इस साल यह इसी राशि में रहेगा। हालांकि जून में केतु नक्षत्र परिवर्तन करेंगे। इस समय केतु ज्येष्ठा नक्षत्र में हैं, जो बुध ग्रह का नक्षत्र है और 2 जून को केतु अनुराधा नक्षत्र में प्रवेश करेंगे जिसके स्वामी शनिदेव हैं। केतु के इस नक्षत्र परिवर्तन का सभी 12 राशियों पर शुभ-अशुभ प्रभाव पड़ेगा।
