इंदौर, एमवाय अस्पताल में पिछले दिनों एक बच्चे को लाया गया जिसने एलईडी बल्ब निगल लिया था। विशेषज्ञों ने सिटी स्कैन कर जांच करने की कोशिश की और तीन-चार बार सिटी स्कैन करने पर समस्या समझ आई। पता चला कि फेफड़े की नली में बल्ब फंसा है, जिससे एक तरफ के फेफड़े ने काम करना बंद कर दिया है। फिर दूरबीन पद्धति से बच्चे का ऑपरेशन कर नली में फंसे बल्ब को निकाला गया। बच्चे का नाम कार्तिक पिता जितेंद्र पाटिल है और परिवार भागीरथपुरा का रहने वाला है।

अस्पताल के नाक, कान, गला विभाग के विभागाध्यक्ष डा. आरके मूंदड़ा ने बताया कि बल्ब में दो तार भी लगे थे। पहले बच्चे के माता-पिता ने उसे निजी अस्पताल में दिखाया था, लेकिन वहां चार दिन के इलाज का फायदा नहीं निकला। उसके बाद वे बच्चे को कुछ दिन पहले एमवायएच लेकर आए थे। बच्चे की जांच कर समस्या समझी। बाद में डॉ. यामिनी गुप्ता और डा. जगराम वर्मा की टीम ने यह कठिन ऑपरेशन सफलतापूर्वक किया। ऑपरेशन के बाद कुछ दिन बच्चे को ऑब्जर्वेशन में रखकर कुछ दिन पहले छुट्टी दे दी गई है। अब बच्चा स्वस्थ है और उसे सांस लेने में कोई समस्या नहीं है।

आमतौर पर आलपिन निगलने के केस आते हैं

डॉक्टरों का कहना है कि अस्पताल में आमतौर पर सिक्का या आलपिन निगलने के केस आते हैं। आमतौर पर बच्चे 1 या 2 साल की उम्र में ऐसा कर लेते हैं। 9 महीने के बच्चे द्वारा एलईडी बल्ब निगलने का संभवत: यह पहला मामला है।

By kgnews

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