छत्तीसगढ़ के बिलासपुर हाईकोर्ट में तलाक के मामले में अहम सुनवाई हुई है. शादी के 90 दिन बाद ही पत्नी ससुराल से मायके लौट आई और पति लेने पहुंचा तो ससुराल जाने से इंकार कर दिया. इसके साथ ही पत्नी ने पति को मायके में रहने के लिए दबाव बनाया. इस मामले में बिलासपुर कोर्ट ने कहा कि है कि दबाव बनाना पत्नी की क्रूरता है.

शादी के 3 महीने बाद मायके गई पत्नी
दरअसल कोरबा जिले के दंपती हैं. 2011 में दोनो की शादी हुई थी लेकिन 3 महीने बाद ही पत्नी ससुराल छोड़कर मायके चली गई. पति के समझाने के बाद भी पत्नी नहीं लौटी तो मामला हाईकोर्ट में पहुंच गया और हाईकोर्ट के जस्टिस गौतम भादुड़ी और जस्टिस एनके चंद्रवंशी की बेंच ने पत्नी के द्वारा पति को मायके में रहने के लिए दबाव बनाने को क्रूरता माना है और तलाक की अपील को मंजूरी दे दी है.

पति को मायके में रहने के लिए बनाती थी दबाव
पति सबसे पहले इस मामले में फैमली कोर्ट गया. जहां तलाक की याचिका को खारिज कर दिया गया. फिर पति ने हाईकोर्ट में अपील किया जहां सुनवाई हुई है. पति ने अपनी याचिका में बताया है कि एक दिन बिना जानकारी दिए पत्नी अपने अपने पिता के साथ मायके चली गई. पत्नी कहती थी कि पति के परिजनों के साथ नहीं रह सकती. पति को मायके में रहना होगा. अगर नहीं रहेगा तो पत्नी दहेज प्रताड़ना का केस करेगी. पत्नी ये धमकी लगातार देती रही है.

हाईकोर्ट ने SC के फैसला का हवाला दे कर तलाक को मंजूरी दी
बिलासपुर हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला देते हुए इस तलाक को मंजूरी दी है. जिसमें कहा गया था कि भारतीय परिवारों में शादी के बाद पति को माता-पिता से अलग रहने की परंपरा नहीं है. बच्चे की परवरिश और पढ़ाई लिखाई कराने के साथ योग्य बनाने वाले माता पिता नहीं चाहते कि उनका बेटा अलग रहे. खासकर परिवार में कमाने वाला सदस्य बेटा ही हो तो और ऐसी स्थिति में पति पर अपने परिजनों से अलग रहने का दबाव डालना क्रूरता माना गया

By kgnews

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