छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में सर्व आदीवासी समाज समाज द्वारा विश्व आदिवासी दिवस का आयोजन किया गया। कांग्रेस से अलग होने के बाद सर्व आदिवासी समाज के आयोजन में पहली बार पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं वरिष्ठ आदिवासी नेता अरविंद नेताम शामिल होने पहुंचे। उन्होंने नई पार्टी बनाए जाने के सवालों पर कहा कि अब युवाओं को, नई पीढ़ी को जागरूक होना है और जल जंगल जमीन संसाधन जो खत्म हो रहे हैं उसके लिए एकजुट होकर लड़ाई लड़ना है। मैं बहुत सोच समझकर यह फैसला लिया है।  जो आदिवासियों और मूल निवासियों के हित में बात करेगा उसी का शासन होगा। जब मीडिया ने पूछा कि कांग्रेस में वरिष्ठ मंत्री से लेकर प्रदेश अध्यक्ष आदिवासी समाज के हैं तो उन्होंने सीधे-सीधे आदिवासी कांग्रेस के नेताओं को सरकार के दलाल बताया और मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के ऊपर भी आरोप लगाया कि उन्होंने उनको कुछ भी बोलने से मना किया है। मुख्यमंत्री भी समाज के नाम पर दलाली करने उतरे हुए हैं।

समर्थन में छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना  

सर्व आदिवासी समाज के आयोजन में बालोद जिला सहित आसपास के आदिवासी एवं सर्व समाज के लोग भी शामिल हुए। छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना के प्रदेश अध्यक्ष अमित बघेल ने अरविंद नेताम के समर्थन में कहा कि हमारे बुजुर्ग जो बोलेंगे वह हम करेंगे और जो भी मूल आदिवासियों मोर छत्तीसगढ़ के निवासियों के हित में बात करेगा छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना उनके साथ सदैव कंधे से कंधा मिलाकर चलेगी। स्थानीय लोगों को उनका अधिकार दिलाना बेहद अनिवार्य है चाहे प्रशासन में हो चाहे उद्योग में हो, चाहे राजनीति में। हर तरफ हम मूल निवासियों को आगे देखना चाहते हैं। स्थानीय निवासी स्थानीय समाज को सर्वोच्च पदों पर देखना चाहते हैं हमारा समर्थन अरविंद नेताम जी के साथ हमेशा रहेगा।

सर्व समाज को मिला नेवता

सर्व आदिवासी समाज द्वारा इस बार विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर सभी स्थानीय समाज के प्रमुखों को भी निमंत्रण दिया गया था। सर्व आदिवासी समाज के प्रदेश अध्यक्ष एवं जिला अध्यक्ष ने चर्चा के दौरान बताया कि हम आप सभी को एक साथ लेकर चलना चाहते हैं तभी हमारे छत्तीसगढ़ का कुछ भला हो पाएगा और सब समाज मिलकर एक संगठन के रूप में आगे बढ़ेंगे तो हम हर वर्ग के अधिकारों के लिए लड़ने में सफल हो पाएंगे बिखराव ही हम सबको पिछड़ा कर देता है।

परंपरा की दिखी झलक

विश्व आदिवासी दिवस के आयोजन में छत्तीसगढ़िया संस्कृति की झलक देखने को मिली। यहां पर हर वर्ग, हर समुदाय के लोग शामिल हुए तो आदिवासी समाज के युवक-युवतियों महिला पुरुष पारंपरिक वेशभूषा में नजर आए। उन्होंने सभी अतिथियों का पारंपरिक टीका चावल लगाकर अभिनंदन किया। 

By kgnews

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