राजनांदगांव श्री चंद्रमौलेश्वर भगवान महाकाल की शान में विकास नगर (लखोली) में आयोजित श्रीशिव महापुराण कथा में कथावाचक पं. ईश्वर चन्द्र व्यास ने उल्टा मंत्र जपने की ताकत बताई। कहा कि शिव मंदिरों के पूजा के अंत में रुद्राष्टक का पाठ रोज किया जाना चाहिए। इससे भगवान शिव जल्द ही प्रसन्न हो जाते हैं। महाराज ने उल्टा मंत्र जपने के बारे में कहा कि इससे मंत्र की शक्ति कई गुना बढ़ जाती है। गोस्वामी तुलसी दास ने महर्षि वाल्मीकि के संबंध में कहा कि उल्टा मंत्र जप जप जाना वाल्मिकी भय ब्रह्म समाना कहा है। महाराज ने बताया कि बौद्ध धर्म को निष्तेज करने वाले आदि शंकराचार्य विष्णु सहस्त्र नाम के परम उपासक थे। वे भी इसका उल्टा पाठ कर शक्ति अर्जित की थी। उन्होंने कहा कि विनोबा जी भी विष्णु सहस्त्र नाम का नित्य प्रात: पाठ किया करते थे। महाराज ने गायत्री मंत्र के संबंध में ऐसा ही बताया। इसका एक करोड़ पाठ किया जाना चाहिए। इससे वेद माता गायत्री की कृपा अनुकंपा बरसती है। कथावाचक ने आगे बताया कि भले ही आदि शंकराचार्य शिव स्वरूप थे। लेकिन वो विष्णु जी के परम उपासक भी थे। जैसे भगवान शिव श्रीराम को पूजते है व भगवान श्रीराम शिव की पूजा करते हैं। तुलसी दास जी ने भगवान राम की ओर से लिखा है- शिव द्रोही मम दास कहा वा… ते नर मुझे सपने हू नहीं भावा…। महाराज जी ने गीता प्रेस के रामनाथ गोयनका के बारे में बताया कि उन्होंने रामायण गीता महाभारत से लेकर सैकड़ों वेद-पुराण आदि धर्म ग्रंथ का प्रकाशन कर हम सनातन धर्मियों पर बड़ा उपकार किया है। श्री कृष्ण भक्त गोयनका को राधारानी ने साक्षात दर्शन दिए थे।

By kgnews

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