राजनांदगांव , प्रतिवर्ष क्वांर व चैत्र नवरात्रि पर्व में मां के भक्तों द्वारा विशाल भंडारा कराया जाता है। यह सिलसिला हर छह माह में किया जाता है। साल 2025 के क्वांर नवरात्रि में पूरे भक्तिभाव से भक्तों ने भंडारा संपन्न कराया। लेकिन छह माह बाद 2026 के चैत्र नवरात्रि में माता के भंडारा पर अमेरिका-ईरान-इजराइल युद्ध का असर दिखाई पड़ रहा है।
भक्तों के द्वारा देवी मंदिरों में पंचमी तिथि से भंडारा प्रसादी की शुरुआत की जाती थी, लेकिन इस चैत्र नवरात्रि के अंतिम तिथि यानी 27 मार्च तक यह सिलसिला कम ही दिखा। जिसका मुख्य कारण गैस सिलेंडर की पर्याप्त व्यवस्था नहीं बताया जा रहा है। पहले बड़ी आसानी से भक्तों को गैस सिलेंडर उपलब्ध हो जाते था। लेकिन अब व्यवसायिक सिलेंडर तो मिल ही नहीं रहा। वहीं घरेलू गैस सिलेंडर के लिए 25 से 30 दिनों का समय लग रहा है। इस समस्या का असर माता के भंडारा में दिखाई दे रहा है। माता जी के जो भक्त अपनी मन्नत पूरी होने पर विशाल भंडारा करते थे, वहीं अब मन्नत होने पर सीमित संख्या में भंडारा रहे हैं, क्योंकि गैस सिलेंडर की जगह चूल्हा में लकड़ी-कंडा का उपयोग करना पड़ रहा है, जो कि अब समय के साथ-साथ मेहनत का कार्य हो गया है। इसलिए भक्त अब भंडारा का ट्रेंड बदल रहे हैं। मन्नत के अनुसार थोड़ा बहुत पकवान बनाकर वितरण कर किए। उसकी जगह अपनी श्रद्धानुसार साथ ही सूखे मेवा, फल-फ्रूट, आइसक्रीम, शरबत, बिस्किट के पैकेट आदि का वितरण किए।
चूल्हे से पकवान बनाने से समय ज्यादा लगता है शहर के जग्गा यादव (जग्गा हलवाई) ने बताया कि हर वर्ष दोनों नवरात्रि में माता के भंडारा के लिए आर्डर आते हैं, लेकिन इस वर्ष चैत्र नवरात्रि पर चार से पांच आर्डर हमने कैंसिल कर दिया। इसका मुख्य कारण गैस सिलेंडर की सीमित संख्या है। आजकल सभी को जल्दी है, ग्राहक भी जल्दी आयोजन चाहते हैं। गैस सिलेंडर से सामाग्री जल्दी बन जाती है, लेकिन गैस सिलेंडर पर्याप्त नहीं मिलने से खाना बनाने वालों को भी परेशानी होती है। पारंपरिक चूल्हा, कंडा से पकवान बनाने से समय के साथ मेहनत ज्यादा लगता है।
