राजनांदगांव/डोंगरगढ़ रेलवे में नौकरी लगाने के नाम पर युवाओं को ठगने वाले अंतरराज्यीय गिरोह के मास्टरमाइंड को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। आरोपी सुखेंद्र चंद्राकर (30 वर्ष) मूलत: कवर्धा जिले के छीतापारा का रहने वाला है।जिसने डोंगरगढ़ के अछोली में जनपद सदस्य के बेटे योगेश हिरवानी से 18 लाख रुपए की ठगी की थी। इस तरह की ठगी के लिए आरोपियों का एक बड़ा गिरोह काम कर रहा था। जिन्होंने छग के अलावा पश्चिम बंगाल, उड़ीसा और एमपी के युवाओं से भी ठगी की है। डोंगरगढ़ पुलिस की माने तो गिरोह द्वारा की गई ठगी की रकम करोड़ों में है।डोंगरगढ़ पुलिस ने बताया कि युवाओं को झांसे में लेने के लिए आरोपियों ने कोलकाता के वर्धमान इलाके में रेलवे के डीआरएम कार्यालय के सामने एक फर्जी ट्रेनिंग सेंटर भी बना रखा था। जहां रकम लेने के बाद पहले फर्जी ज्वाइनिंग लेटर देकर विश्वास जीता जाता, इसके बाद आरोपी अपने फर्जी ट्रेनिंग सेंटर में 3 महीने ट्रेनिंग देकर ज्वाइनिंग के लिए अगली तारीख की बात कही जाती, लेकिन लंबे समय बाद भी ज्वाइनिंग नहीं मिली तो अछोली के पीड़ित ने रेलवे बोर्ड से जानकारी ली। इसके बाद ठगी की जानकारी मिली।बंगाल में तीन, छग में तीन आरोपी गिरफ्तार डोंगरगढ़ पुलिस ने ठगी में शामिल रहे दो आरोपियों को कुछ माह पहले गिरफ्तार किया है। इसके अलावा पश्चिम बंगाल की वर्धमान पुलिस ने भी इस गिरोह के तीन सदस्यों को गिरफ्तार किया है। लेकिन मास्टर माइंड सुखेंद्र चंद्राकर लंबे समय से फरार था, वह लगातार पुलिस को चकमा दे रहा था। जिसे पुख्ता सूचना के बाद डोंगरगढ़ पुलिस ने बिलासपुर से गिरफ्तार किया है। पुलिस को एक अन्य आरोपी संतोष जायसवाल की तलाश है। आरोपियों से कई दस्तावेज भी जब्त किए गए हैं। इसके अलावा लाखों रुपए के चेक और बैंक खातों का भी खुलासा हुआ है। जिसकी जांच जारी है।सब कुछ हाईटेक, फिर भी झांसे में आ रहे युवा नौकरी के नाम पर ठगी के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। रेलवे के अलावा पुलिस बल, वन विभाग सहित अन्य विभागों में भी रिक्त पदों पर भर्ती के लिए ठगी के मामले जिले में सामने आ चुके हैं। इसमें कई आरोपियों की गिरफ्तारी भी हो चुकी है। लेकिन ऐसे मामलों में कमी नहीं आ रही है। इन दिनों ज्यादातर विभागों की भर्ती संबंधी सारी प्रक्रिया ऑनलाइन होती है। इसके अलावा विभाग इस तरह के ठगों से बचने की भी अपील जारी करते हैं। जिसके बाद भी बेरोजगार युवा अपने परिवार की गाढ़ी कमाई इस तरह के झांसे में आकर डुबा रहे हैं। पुलिस भी समय-समय पर ऐसे झांसों से बचने की अपील करती रही है।कर्मचारियों की संलिप्तता की भी आशंका जिस सफाई से आरोपी पूरी ठगी को अंजाम दे रहे थे। उस लिहाज से आरोपियों को रेलवे के ही कर्मचारियों की मदद मिलने की आशंका भी जताई जा रही है। इसे लेकर भी पश्चिम बंगाल पुलिस की टीम जांच रही है। वहीं डोंगरगढ़ पुलिस भी इसके तार खंगाल रही है। डीआरएम कार्यालय के सामने बेधड़क चल रहे ट्रेनिंग सेंटर से लेकर रिक्त पदों की पूरी वास्तविक डिटेल गिरोह के पास रहती थी। जिसकी वजह से किसी तरह के क्रास चेक में भी आरेापियों का षड़यंत्र खुलकर सामने नहीं आ पाता था, आशंका है कि मामले में रेलवे के कुछ कर्मचारी भी पूछताछ के दायरे में आ सकते हैं। चार राज्यों में हुई ठगी की रकम करोड़ों में हैं।
