राजनांदगांव। शहर के रामाधीन मार्ग में श्री श्यामकुटी में बने श्री दासीश्याम प्रभु के दरबार व श्री खाटु मंदिर में श्री श्यामकुटी परिवार एवं श्री दासश्याम मंडल के श्रद्धालुओं भक्तों द्वारा अपनी प्यारी श्रीगुरू मां की 26 वीं जयंती का तीन दिवसीय महोत्सव बड़े धुम-धाम से मनाया जा रहा है। जयंती महोत्सव 11, 12 व 13 अगस्त 3 दिन का होगा। जयंती प्रथम दिवस पर स्टेशन पारा के शक्तिधाम में सुप्रसिद्ध भजन गायक व श्री हनुमान जी का सुंदर काण्ड का हजारों कार्यक्रम करने वाले पं. निखिल मिश्रा व पं. श्री श्याम शर्मा द्वारा भजन गायन का कार्यक्रम होगा। जयंती महोत्सव में कुछ संतजन एवं श्रीश्याम कुटी परिवार के श्रद्धालु-सेवकगणों के आने सीलसीला शुरू हो गया है। जयंती महोत्सव पर श्यामकुटी, शक्तिधाम एवं श्री अग्रसेन भवन बड़ी धुमधाम रहेगी। कार्तिक की तुलसी ग्यारस को श्रीश्यामकुटी परिवार ने अपने श्री दासीश्यामप्रभु की 25 जयंती होने पर रजत जयंती वर्ष तथा श्री खाटु वाले श्रीश्याम प्रभु की स्थापना के 50 वें वर्ष होने पर रजत एवं स्वर्ण महोत्सव एक साथ मनाया था जिसकी सुमधुर स्मृतियां, यादे अभी भी अपने मन में सजोये हुवे है। जिसकी चर्चा भी इस 26वीं जयंती महोत्सव पर आने वाले भक्तजन मिल बैठकर करेंगे। जयंती की तैयारी में भक्तजन जुट गये है। श्री खाटुश्याम की नगरी खाटु में बने विशाल प्रवेश द्वार की तरह श्री श्यामकुटी परिवार भी एक विशाल श्री श्यामशक्ति द्वार का निर्माण श्यामकुटी के पास करवा रहा है जिसकी प्रक्रिया भक्तजनों ने शुरू कर दी है।
जयंती के द्विवतीय दिवस 12 अगस्त दिन मंगलवार को दिनप्रतिदिन की तरह श्री दासीश्यामप्रभु की आरती, भजन, सतसंग, कीर्तन के पश्चात शाम के 6 बजे श्री दासीश्यामप्रभु की शोभायात्रा निकाली जावेगी। जो शहर भ्रमण के पश्चात स्टेशन पारा के शक्तिधाम जावेगी।
रजत एवं स्वर्ण जयंती तो श्री दासीश्याम मंडल ने 2024 में मना ली है और अब जयंती पर्व की 50वीं स्वर्ण जयंती तथा श्री श्यामप्रभु की स्थापना के 75 वर्ष होने पर हीरक जयंती मनायी जायेगी। स्वर्ण व हीरक जयंती दोनो एक साथ मनाने का भक्तों ने अपना मन बना लिया है। जयंती पर्व के तृतीय दिवस पर सुबह 8 बजे श्री दासीश्यामप्रभु ज्योत भी समस्त भक्तों द्वारा ली जावेगी और भजन किर्तन, सतसंग के पश्यात 13 अगस्त को रात 9 बजे से स्टेशन पारा के शक्तिधाम भजन, जागरण सुबह 6 बजे तक किया जावेगा। श्री श्यामकुटी परिवार के बच्चों द्वारा अपनी-अपनी सेवाएं भजन लिखने वाले, भजन गाने वाले, साज बजाने वाले, श्रृृंगार करने वाले, प्रसादी व्यवस्था के साथ पुरे कार्यक्रम की व्यवस्था करने वाले अपनी सेवाएं दे रहे है। यहा आने वाले भक्तगण जो कि कई वर्षों से आ रहे है उनके बेटे, बहु, पोते-पोती तथा बेटियां-जवाई और नाती-नतीन भी दरबार को मनने लगे है और अपनी उपस्थिति समय-समय पर दर्ज कराते रहते है।
