⏩विष्णु देव सरकार पर अनुयायियों को भरोसा


राजनांदगांव//डोंगरगढ़ धर्मनगरी और हर धर्मों के लोगों की भावनाओं का सम्मान लिए हुए यह धार्मिक नगरी डोंगरगढ़ भारत ही नहीं अपितु सात समुंदर पार भी अपनी अनूठी पहचान बनाने का दायित्व बखूबी निभा रही है। अमेरिका, जापान, श्रीलंका,कंबोडिया और अन्य राष्ट्रों में भी डोंगरगढ़ की धार्मिक ख्याति विद्यमान है। इसी डोंगरगढ़ को विश्व के मानचित्र में उचित स्थान दिलाने केन्द्र की प्रसाद योजना लाई गई है। इसी धार्मिक नगरी की पहाड़ी पर सुदर्शन वाल्मीकि समाज के संत शिरोमणि इष्ट गुरु और त्रिकालदर्शी सुदर्शन महाराज और महाऋषि , वाल्मीकि जी जिन्होने प्रथम पवित्र ग्रंथ रामायण की रचना की है उनकी मूर्तियों को हजारों की संख्या मे मानने वाले उनके अनुयायियों ने स्थापित किया है और वहां प्रदेश भर के अनुयायियों के आस्था का केन्द्र बनता जा रहा है। स्थानीय लोगों और सामाजिक ट्रस्ट ने उक्त स्थान को बेहतर बनाने को लेकर अपनी मांग रखी है जिसमें अष्टधातु मूर्ति एवं सौन्दर्गीकरण की मांग प्रमुख है।
⏩सुदर्शनगिरि ट्रस्ट समिति ने मुख्यमंत्री से भी किया आव्हान
शासन के द्वारा पहाड़ी पर अष्ट धातु की मूर्तियां लगाने और सौंदर्यीकरण करने की मांग को लेकर मुख्य मंत्री जनचौपाल में आवेदन पेश किया गया था कि ग्राम अछोली प.ह.नं. 22 स्थित खसरा नंबर 254/1 में पहाड़ के उपर महर्षि वाल्मिकीजी, संत सुदर्शनजी की मूर्ति स्थापित है। जिसके पहाड के सौन्दर्याकरण तथा अष्टधातु मूर्ति एवं प्रवेश द्वारा निर्माण हेतु मुख्यमंत्री स्वेच्छानुदान मद से राशि की मांग की गई है।उक्त संबंध में मौका जांच किया गया तथा जांच में पाया गया कि ग्राम अछोली प.ह.नं. 22 स्थित खसरा नंबर 254/1 पहाड व चट्टान (शासकीय भूमि) मद में दर्ज है। उक्त भूमि पहाड़ के उपर महर्षि वाल्मिकी जी तथा संत सुदर्शन जी की मूर्ति स्थापित है।
⏩संत सुदर्शन व महर्षि वाल्मीकि पहाड़ी तक पहुंच पाना है कठिन डगर
धार्मिक नगरी डोंगरगढ़ की पहाडी पर स्थापित संत सुदर्शन व महर्षि वाल्मीकि पहाड़ी तक पहुंच पाना आसान नहीं है अनुयायियों को पहुंचने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है इस कठिन डगर पर लोगों को उपर जाने तक का मार्ग कच्चा और टूटा होने के कारण पहुंचने में काफी कठिनाई होती है, उक्त स्थल पर सडक निर्माण की और आस-पास सौन्दर्गीकरण की भी आवश्यकता है। स्थल पर पेयजल उपलब्धता नहीं है, जिसके लिये पानी लाईन बिछाना भी आवश्यक है। उक्त स्थान का निर्माण तथा सौन्दर्याकरण किया जाना अतिआवश्य है ताकि दूर दराज से लोगो को स्थल तक पहुंचने दिक्कतो का सामना न करना पड़े सौन्दर्गीकरण करने तथा महिर्ष वाल्मिकी जी तथा संत सुदर्शन जी की अष्टधातु मूर्ति हेतु आर्थिक सहायता की मांग की गई है। साथ ही महर्षि वाल्मिकी जी की मूर्ति तक जाने वाले मार्ग जो सरकारी अस्पताल के सामने चौक है, वहां भव्य स्वागत द्वार बनाये जाने हेतु भी आर्थिक सहायता की मांग की गई है। आवेदित स्थल को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाना चाहिए । सभी धर्म के आस्था का केंद्र के रूप में विकसित होकर केंद्र की प्रसाद योजना के लिए डोंगरगढ़ का चयन किया जाना इस बात को इशारा करता है कि यहां सभी धर्म का बराबर सम्मान किया जाता है
⏩प्रदेश की विष्णु देव सरकार धार्मिक महत्वपूर्ण स्थानों के विकास पर दे रहे हैं जोर
छत्तीसगढ़ प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णु देव सांय धार्मिक आस्था और महापुरुषों के सम्मान में अग्रणी नजर आते हैं ऐसे में धार्मिक नगरी डोंगरगढ़ में रामायण के प्रथम रचयिता महर्षि वाल्मिकी जी और संत शिरोमणि सुदर्शन महाराज के महत्वपूर्ण स्थान को विकास की दिशा में ले जाने की इच्छाशक्ती प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णु देव सांय सरकार में ही नजर आ रही है। हजारों की संख्या में सुदर्शन वाल्मीकि समाज के लोग जब पहाड़ी पर सौंदरीकरण और विकास के कार्य होते देखेंगे तो निश्चित रूप से यह महर्षि वाल्मीकि और संत सुदर्शन महाराज के अनुयायियों में प्रसन्नता जाहिर होगी और डोंगरगढ़ की धरा और भी पवित्र होगी।
