राजनांदगांव , चैत्र नवरात्रि में शहर के प्रमुख देवी मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। पूजा-अर्चना के लिए सुबह से देर शाम तक लोग मंदिर पहुंच रहे। वहीं मनोकामना ज्योत से भी मंदिर प्रकाशित है। शहर के प्रमुख मंदिरों में एक भरकापारा के मां काली मंदिर में भी लोग आशीर्वाद लेने पहुंच रहे हैं।
मंदिर समिति के रघु शर्मा ने बताया कि मंदिर की स्थापना करीब 100 साल पहले हुई। तब तालाब के खुदाई के दौरान सात बहनों के रुप में देवी की प्रतिमाएं मिली। जिसे ही देवी के सात स्वरूपों के रुप में स्थापित किया गया। आज मां काली शक्तिपीठ के रुप में मंदिर की पहचान है। मंदिर में विराजित मां श्मशान काली की प्रतिमा स्वयंभू है। मान्यता है कि माता के दर्शन मात्र से ही तंत्र बाधा और रोगों का नाश हो जाता है। मां त्रिपुर सुंदरी का यह रियासतकालीन मंदिर वैदिक और तंत्र अनुष्ठान का अनूठा संगम है। यहां विराजमान मां काली शारीरिक और मानसिक रोगों से भी छुटकारा दिलाती हैं।
इसे राजयोग देने वाला मंदिर कहते हैं, भक्तजनों का अटूट विश्वास है मंदिर समिति के रघु शर्मा ने बताया कि नवरात्र के दिनों में इस मंदिर में भक्त तांत्रिक पूजा करने यहां आते हैं। तांत्रिक अपनी सिद्धि पूरी करने के लिए माता की ही पूजा करते हैं। तंत्र-मंत्र की जितनी भी पूजाएं होती हैं, वो इस चमत्कारिक मंदिर में सालों से होती आ रही हैं। इस मंदिर को राजयोग देने वाला मंदिर भी कहते हैं। स्थानीय पंडित बताते हैं कि राजनेता इस मंदिर में माथा टेकने आते हैं क्योंकि ऐसी मान्यता है कि मां त्रिपुर सुंदरी के आशीर्वाद से सत्ता का सुख मिलता है।
दीपावली के बाद मां के इसी आंगन में होती है प्रदेश की पहली मड़ई दीपावली के बाद छत्तीसगढ़ में मेले मड़ई का दौर शुरु हो जाता है, जो महाशिवरात्रि तक अनवरत चलता है। प्राचीन काल से छत्तीसगढ़ की प्रथम मड़ई मां काली के इसी आंगन में आयोजित हो रही है। यहां दीवाली के बाद भाई दूज के दिन पुराना बस स्टैंड परिसर में मेला सजता संवरता है। जिसके बाद जिले सहित प्रदेश भर में मेले मड़ई का दौर शुरू हो जाता है। इसके अलावा बाना, बैरन, खप्पर, खडग की पूजा और छग की परंपरागत पूजा पद्धति की रस्में इस देवालय में निरंतर निभाई जा रही है।
