राजनांदगांव जिले के सात जलाशयों में पानी का स्तर 30 फीसदी से कम हो गया है। अब ऑन डिमांड पानी छोड़े जाने की स्थिति पर संशय बन गया है। नगर निगम ने मोंगरा बैराज ईई को रिजर्व पानी छोड़ने के लिए पत्र लिखा है। लेकिन ईई का पक्ष है कि अभी पूरी गर्मी शेष है। ऐसे में स्थिति को देखकर ही पानी छोड़ा जाएगा। फिलहाल पानी छोड़ने की तैयारी नहीं हैं।

बता दें कि मोंगरा बैराज में स्टोरेज क्षमता का महज 22 फीसदी पानी ही मौजूद है। जबकि अभी पूरा गर्मी का मौसम सामने है। इसी पानी से शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों में पेयजल और निस्तारी की आपूर्ति की जानी है। लेकिन जलस्तर तेजी से घटने की वजह से अब पानी छोड़ने के लिए अफसरों को विचार करना पड़ रहा है। इधर शहर के मोहारा एनीकट में जलस्तर से तेजी से घट रहा है। रोजाना एनीकट का पानी डेढ़ इंच तक कम हो रहा। इससे आपूर्ति आगे फिर डगमगा सकती है। निगम आयुक्त अतुल विश्वकर्मा ने बताया कि एनीकट की स्थिति को देखते हुए 15 अप्रैल से ही पानी छोड़ने के लिए पत्र लिखा जा चुका है।

पानी जल्द देने की मांग की गई है। वाष्पीकरण से भी जलस्तर घटा जल संसाधन विभाग के अफसरों ने बताया कि जलाशय का स्तर घटने की बड़ी वजह वाष्पीकरण भी है। इसके चलते भी जलाशयों में तेजी से पानी सूखने लगा है। तापमान लगातार 40 डिग्री के पार है। तेज धूप और गर्मी भी पानी सूखा रही है। इसके अलावा एनीकटों में लीकेज होने भी पानी स्टोर नहीं हो रहा है। जबकि सभी एनीकट को पूरा भरने के बाद ही ओवरफ्लो का पानी शहर को दिया गया था। इसके बाद भी सभी सूख गए हैं।

हफ्तेभर में पानी नहीं मिला तो आपूर्ति पर होगा असर मोंगरा बैराज से मोहारा एनीकट तक शिवनाथ में 11 एनीकट है। इसमें से ज्यादातर एनीकट सूख चुके हैं। मोहारा से रोजाना बड़ी मात्रा में पानी शहर में जलापूर्ति के लिए तीन-तीन वाटर ट्रीटमेंट प्लांट में लिया जा रहा है। कम पानी को देखते हुए दो तीन में तीन टाइम ही पानी दिया जा रहा है। एनीकट का लेवल गिर रहा है। निगम के मुताबिक यहां सिर्फ 10 दिन का पानी शेष है। ऐसे में जल्द पानी नहीं मिला तो आपूर्ति पर असर पड़ेगा।

जलाशयों में ऐसी है स्थिति मोंगरा बैराज – 22. 58 % सूखा नाला बैराज – 10.14 % खातूटोला बैराज – 15.00 % घुमरिया जलाशय – 20.00 % मटियामोती जलाशय – 26.00 % रुसे जलाशय – 9.18 % ढारा जलाशय – 5.08 % (जल संसाधन विभाग से मिले आंकड़े)

By kgnews

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