सरगुजा
सरगुजा के डिगमा गांव की रहने वाली रत्ना मजूमदार ने शादी के बाद अपने परिवार की खेती को नई दिशा दी। रत्ना ने नेशनल रूरल लाइवलीहुड मिशन की महिला समूह से जुड़कर लोन लिया और दो एकड़ में गेंदे के फूल की खेती शुरू की। गेंदे के फूल की खेती में प्रति एकड़ करीब एक लाख रुपये की लागत आती है और उत्पादन करीब दो लाख रुपये तक पहुंच जाता है। यानी लगभग 50 से 60 प्रतिशत तक मुनाफा होता है।
खास बात यह है कि तीन महीने में एक फसल तैयार हो जाती है और साल में चार बार उत्पादन मिलता है। रत्ना मजूमदार का कहना है कि ड्रिप इरीगेशन जैसी आधुनिक तकनीक से खेती आसान हो गई है और युवाओं को भी खेती की ओर आना चाहिए। रत्ना मजूमदार ने आईएएनएस से बात करते हुए बताया कि शादी के बाद जब मैं ससुराल आई तो देखा कि मेरे ससुराल वाले फूल की छोटी खेती करते थे। मैं मां महामाया समूह में जुड़ी तो देखा कि यहां से लोन लेकर सभी महिलाएं अपने काम को आगे बढ़ाती हैं। मैंने भी समूह से लोन लिया और इस काम को आगे बढ़ाया। पहले हम लोग छोटे पैमाने पर करते थे, अब हम लोग दो-तीन एकड़ में करते हैं। उन्होंने बताया कि हम लोगों की लागत डेढ़ से दो लाख रुपए लग जाती है और प्रॉफिट 50 प्रतिशत तक आ जाती है।
उन्होंने बताया कि गेंदे के फूल की खेती के लिए पौधे कोलकाता से आते हैं। उन लोगों से हम पौधों को खरीदते हैं और अपने खेतों में लगाते हैं। पहले महीने में इसका फूल आ जाता है। ये फूल तीन महीने तक लगातार चलते हैं। फिर हम लोग इसको हटाकर नए पौधे लगाते हैं। उन्होंने पीएम मोदी का धन्यवाद किया और कहा कि हम महिलाओं को लोन देकर आगे बढ़ाने के लिए पीएम मोदी को धन्यवाद देती हूं। उन्होंने सभी महिलाओं से अपील की कि आप भी समूह में जुड़िए। अपने छोटे-मोटे काम को आगे बढ़ाइए। यानी अगर आधुनिक तकनीक के साथ खेती की जाए तो खेती भी रोजगार का बड़ा जरिया बन सकती है। सरगुजा से यह कहानी युवाओं के लिए प्रेरणा बन रही है।

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