नारी शक्ति वंदन: वन धन केन्द्रों से आत्मनिर्भर बन रहीं जनजातीय वर्ग की महिलाएं

नारी शक्ति वंदन: वन धन केन्द्रों से आत्मनिर्भर बन रहीं जनजातीय वर्ग की महिलाएं

वन धन विकास केन्द्र महिलाओं को बना रहे ‘लाभार्थी’ से ‘उद्यमी’

भोपाल 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश सरकार जनजातीय एवं विशेष रूप से पीवीटीजी वर्ग की महिलाओं के समग्र सशक्तिकरण के लिए निरंतर प्रभावी कदम उठा रही है। वन धन विकास केन्द्र इस वर्ग की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के प्रमुख माध्यम बनकर उभरे हैं। यहां महिलाओं का कौशल उन्न्यन किया जा रहा है, इससे उन्हें आजीविकोपार्जन के आधार मिल रहे हैं और वह आत्मनिर्भर बन रही हैं। उन्हें सामाजिक सम्मान भी मिल रहा है। सरकार के इन प्रयासों के ‘नारी शक्ति वंदन’ की भावना व्यवहारिक रूप से साकार हो रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश सरकार द्वारा उठाए गए ये कदम जनजातीय एवं पीवीटीजी महिलाओं के जीवन में स्थायी बदलाव ला रहे हैं। वन धन विकास केन्द्रों के माध्यम से सशक्त होती महिलाएं ‘सशक्त महिला, सशक्त समाज, सशक्त भारत’ के संकल्प को वास्तविक रूप दे रही हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव का मानना है कि समाज की प्रगति महिलाओं के सशक्तिकरण के बिना संभव नहीं है। उन्होंने कहा है कि हमारी संस्कृति में नारी शक्ति का स्थान सर्वोपरि है, इसलिए राज्य सरकार उनके आर्थिक, सामाजिक और मानवीय उत्थान के लिए पूर्ण प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। तेंदूपत्ता संग्राहक महिलाओं के हित में लिये गये कई ऐतिहासिक निर्णय भी इसी उद्देश्य की पूर्ति करते हैं।

तेंदूपत्ता संग्राहक महिलाओं का जीवन हुआ खुशहाल

तेंदूपत्ता संग्रहण वर्षों से वनवासी और जनजातीय परिवारों की आजीविका का प्रमुख स्रोत रहा है, जो अब इनके आर्थिक सशक्तिकरण का मजबूत आधार बन गया है। राज्य सरकार ने तेंदूपत्ता संग्रहण दर को ₹3, हजार से बढ़ाकर ₹4, हजार प्रति मानक बोरा कर दिया है। इस निर्णय के बाद प्रदेश के तेंदूपत्ता संग्राहकों को लगभग ₹708.8 करोड़ का परिश्रमिक भुगतान किया गया, जिसमें से लगभग ₹344.5 करोड़ सीधे महिला संग्राहकों को प्राप्त हुए। इसके साथ ही ₹132.42 करोड़ के वितरित बोनस में महिलाओं का हिस्सा लगभग ₹64.36 करोड़ रहा। इससे महिलाओं की आय बढ़ रही है। परिणामस्वरूप उनका आत्मसम्मान और सामाजिक प्रतिष्ठा भी बढ़ी है।

आत्मनिर्भरता और नेतृत्व विकास का केन्द्र बने वन धन विकास केन्द्र

वन धन विकास केन्द्र केवल आजीविका के साधन नहीं, बल्कि जनजातीय एवं पीवीटीजी वर्ग की महिलाओं के सर्वांगीण विकास के सशक्त मंच बन चुके हैं। इन केन्द्रों के माध्यम से महिलाएं लघु वनोपज के संग्रहण, प्रसंस्करण और विपणन की गतिविधियों से जुड़कर स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन कर रही हैं। प्रदेश में संचालित 83 पीवीटीजी वन धन विकास केन्द्रों में 3180 महिला सदस्य सक्रिय रूप से कार्यरत हैं। प्रदेश के 126 पीएमजेवीएम वन धन विकास केन्द्रों में 10,591 महिलाएं जुड़ी हुई हैं। अनेक स्व-सहायता समूह पूरी तरह महिलाओं द्वारा संचालित हो रहे हैं, जो सामूहिक नेतृत्व और वित्तीय प्रबंधन का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करते हैं इन केन्द्रों ने महिलाओं को ‘लाभार्थी’ से ‘उद्यमी’ बनने की दिशा में आगे बढ़ाया है।

वन आधारित अर्थव्यवस्था में महिलाओं की मजबूत भागीदारी

प्रदेश में कुल 40.8 लाख तेंदूपत्ता संग्राहकों में लगभग 19.8 लाख महिलाएं शामिल हैं, जो कुल भागीदारी का लगभग 48.6% है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि महिलाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। अब महिलाएं केवल श्रमिक के रूप में नहीं, बल्कि निर्णय लेने वाली, समूह संचालक और आर्थिक गतिविधियों की अग्रणी भूमिका में सामने आ रही हैं। इससे ग्रामीण और जनजातीय समाज की संरचना में सकारात्मक बदलाव दिखाई दे रहा है।

समग्र योजनाओं से नारी सशक्तिकरण

राज्य सरकार ने महिलाओं के जीवन को बहुआयामी रूप से बेहतर बनाने के लिए विभिन्न योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया है। चरण पादुका योजना के तहत संग्राहकों को आवश्यक सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के माध्यम से उन्हें सुरक्षा कवच दिया जा रहा है, वन समितियों से जुड़ कर इस वर्ग की महिलायें सामुदायिक भागीदारी से लाभान्वित हो रही हैं। ग्राम विकास एवं वन संरक्षण के लिए ₹35.31 करोड़ का प्रावधान किया गया है राज्य सरकार की इन पहलों से महिलाओं की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ हो रही है। साथ ही स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक जागरूकता के क्षेत्र में भी सकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।

‘नारी शक्ति वंदन’ बना सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन का आधार

प्रदेश में ‘नारी शक्ति वंदन’ अब एक सशक्त जन-आंदोलन के रूप में विकसित हो चुका है। वन धन विकास केन्द्रों के माध्यम से जनजातीय महिलाएं आत्मनिर्भर बनते हुए अपने परिवार, समाज और प्रदेश के विकास में सक्रिय योगदान दे रही हैं। इस वर्ग की महिलाओं की आजीविका सुव्यवस्थित हो रही है। साथ ही ये नेतृत्व करते हुए नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा बन रही हैं। स्पष्ट है कि सरकार की नीतियां संवेदनशील और समावेशी होती हैं तो नारी शक्ति समाज के हर स्तर पर सकारात्मक परिवर्तन लाने में सक्षम बनती है।

 

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