PM मोदी के ‘कार पूल’ संदेश की हाईकोर्ट में गूंज, पार्किंग संकट पर वकीलों से साथ आने की अपील

 जबलपुर
कार्यवाहक मुख्य न्यायधीश विवेक रूसिया व न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने गुरुवार को हाई कोर्ट के सामने प्रस्तावित 117 करोड़ रुपये के अधिवक्ता चैंबर और मल्टीलेवल पार्किंग प्रोजेक्ट को लेकर दायर याचिका का महत्वपूर्ण दिशा निर्देश सहित पटाक्षेप कर दिया। कोर्ट ने केवल अधिवक्ता चैंबर निर्माण प्रक्रिया लंबित होने पर असंतोष जताया।

इसके साथ ही हाई कर्ट परिसर के आसपास बढ़ते यातायात और पार्किंग संकट पर महत्वपूर्ण गाइडलाइन जारी कर दी। दिलचस्प यह है कि अदालत की टिप्पणियों और निर्देशों में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा समय-समय पर दिए गए कार पूलिंग और यातायात अनुशासन के संदेशों की प्रतिध्वनि भी सुनाई दी।

युगलपीठ ने हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के तत्कालीन अध्यक्ष धन्य कुमार जैन की याचिका का निराकरण करते हुए स्पष्ट किया कि अब जबकि टेंडर प्रक्रिया जारी हो चुकी है, याचिका को लंबित रखने का औचित्य नहीं रह जाता। हालांकि कोर्ट ने यह रास्ता खुला रखा कि यदि भविष्य में राज्य सरकार परियोजना को लेकर अनावश्यक विलंब करती है तो याचिकाकर्ता पुनः न्यायालय का दरवाजा खटखटा सकता है।

कोर्ट ने परियोजना को लेकर संतोष जताया
मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने बताया कि हाई कोर्ट के गेट नंबर-चार के सामने आधुनिक अधिवक्ता चैंबर और बहुस्तरीय पार्किंग निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है। इसका टेंडर भी जारी कर दिया गया है। इसके बाद कोर्ट ने परियोजना को लेकर संतोष व्यक्त किया।

आदेश का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष पार्किंग व्यवस्था को लेकर रहा। कोर्ट ने सरकारी अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे हाई कोर्ट परिसर के निकट अनावश्यक वाहन खड़े करने के बजाय पिक एंड ड्राप व्यवस्था को बढ़ावा दें। अधिवक्ताओं से भी वाहन साझा (कार पूलिंग) करने की व्यवस्था अपनाने की अपेक्षा जताई गई। वहीं यातायात पुलिस को क्षेत्र की सतत निगरानी कर पार्किंग अनुशासन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

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केवल नई पार्किंग बनाना ही समाधान नहीं
दरअसल, चार मई 2025 को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति जेके माहेश्वरी, न्यायमूर्ति एससी शर्मा, न्यायमूर्ति सूर्यकांत व तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश सुरेश कुमार कैत की उपस्थिति में परियोजना का भूमिपूजन हुआ था, लेकिन निर्माण कार्य शुरू नहीं होने से बार एसोसिएशन ने चिंता जताई थी।

न्यायालय के आदेश ने यह संदेश भी दिया है कि केवल नई पार्किंग बनाना ही समाधान नहीं है। यातायात अनुशासन, कार पूलिंग और पिक एंड ड्राप संस्कृति अपनाए बिना न्यायालय परिसर की भीड़भाड़ कम नहीं होगी। यही कारण है कि एक साधारण दिखने वाली याचिका का पटाक्षेप, न्यायालय परिसर की भावी यातायात व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण नजीर बनकर उभरा है।

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