इंदौर
इंदौर-खंडवा-एदलाबाद राजमार्ग का निर्माण पूरी होने की मियाद जनवरी में खत्म होगी, लेकिन अभी तक सुरंग और सड़क का काम पूरा नहीं हुआ है। लगभग तीस फीसद काम होना बाकी है। अब इसके लिए प्रोजेक्ट की डेडलाइन बढ़ाने पर विचार होने लगा है।
निर्माण एजेंसी की तरफ से प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने फाइल को मुख्यालय भेजा है। अधिकारियों के मुताबिक तीन से छह महीने की अवधि बढ़ाई जाएगी। वैसे काम तेज करने के लिए निर्माण एजेंसी को निर्देश जारी कर दिए है।
जनवरी 2025 तक इसे पूरा किया जाना था
216 किमी लंबे राजमार्ग का काम अगस्त 2022 में शुरू किया गया। प्रोजेक्ट को जनवरी 2025 तक पूरा होना था। जमीन अधिग्रहण, सुरंग व अप्रोच रोड निर्माण के दौरान ग्रामीणों से विवाद, दो से तीन बार प्रोजेक्ट में बदलाव ने निर्माण कार्यों गति धीमी कर दी।
इधर भवरकुआं से लेकर तेजाजी के बीच सड़क का हिस्सा बन चुका है। इन दिनों तेजाजी से सिमरोल के बीच सड़क, अंडरपास, फ्लाइओवर का काम किया जा रहा है।
भेरूघाट के पास जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया बाकी
उमरीखेडा वनक्षेत्र से 0.80 हेक्टेयर जमीन की प्रक्रिया अक्टूबर में पूरी हुई है। इतने हिस्से में सड़क अधूरी हो, जो नवंबर से बनाना शुरू की है। इसके अलावा भेरूघाट के पास 800 मीटर जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया होना बाकी है। जमीन के बदले किसानों को मुआवजा दिया जाना है।
यह काम जनवरी तक होगा। सिमरोल से चोरल के बीच भी सड़क पूरी नहीं हो पाई है। जबकि चोरल और बड़वाह के बीच भी कुछ हिस्सों में काम रुका है। फिलहाल मेघा इंजीनियरिंग की तरफ से मियाद बढ़ाने पर जोर दिया है।
सुरंग फरवरी तक होगी पूरी
राजमार्ग पर तीन सुरंग बनाई जाएगी, जो तलाई-भेरुघाट और चोरल में 1300 मीटर की रखी है। सुरंग की अप्रोच फरवरी तक पूरी होगी। साथ ही सुरंग के भीतर भी काफी काम बचा हुआ है। अधिकारियों के मुताबिक अक्टूबर में अप्रोच रोड के लिए ब्लास्टिंग करने पर विवाद हुआ था।
उसके बाद महीनेभर सुरंग के आसपास का काम बंद था। इसका असर प्रोजेक्ट की अवधि पर पड़ा है। वैसे अप्रोच के लिए माउंट ड्रील मशीन बुलवाई है। इससे खोदाई करने पर एजेंसी को तीन से चार महीने का अतिरिक्त समय लग रहा है।
मार्च तक देंगे मोहलत
इंदौर-खंडवा राजमार्ग की डेडलाइन नजदीक आ चुकी है। निश्चित ही प्रोजेक्ट पूरा करने के लिए अवधि बढ़ाना पड़ेगी। इसके लिए प्रक्रिया चल रही है। फाइल को मुख्यालय भेजा गया है। –
सुमेश बांझल, प्रोजेक्ट डायरेक्टर, एनएचएआई
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