राजनांदगांव | शासकीय दिग्विजय महाविद्यालय राजनांदगांव (छ.ग.) में हो रहे तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में तृतीय दिवस की अध्यक्षता डॉ. पूर्णिमा केलकर संस्कृति विभागाध्यक्ष इंदिराकला संगीत विश्वविद्यालय खैरागढ़ (छ.ग.) ने की मुख्य वक्ता डॉ. एस चित्रा भूटान से ऑनलाइन माध्यम से जुड़ी इन्होंने विचारोत्तेजक सत्र ने विभाजन कथा में भौतिक स्मृति (Material Memory) की प्रासंगिकता और महत्व पर गहन प्रकाश डाला, जिसमें उन्होने इसके विकास को प्रथम पीढ़ी के लेखकों से लेकर समकालीन साहित्यकारों तक विस्तृत रूप में प्रस्तुत किया। उन्होंने स्मृति उछाल (Memory Boom) की अवधारणा को रेखांकित किया और यह बताया कि विभाजन के प्रत्यक्ष अनुभवों को पीढ़ी दर पीढ़ी संरक्षित रखने में इसकी क्या भूमिका है।
डॉ. पूर्णिमा केलकर ने शोधार्थियों को शोध के क्षेत्र में नए आयाम गढ़ने के लिए प्रेरित किया साथ ही शोधार्थी रेशमी पत्रकारिता विभाग की सराहना करते हुए बताया गया कि तरह पर्यटन पर शोध करना यह बहुत ही बड़ी चुनौती है इसकी प्रवृति का विस्तार काफी व्यापक है। इसलिए कही भी जाए सजग रहे और हर क्षेत्र में कुछ नया तराशने का प्रयास करते रहे।
डॉ. सुधीर कुमार जे.एन.यू नई दिल्ली ने शोध पत्रों की समीक्षा करते हुए शोध की बारीकियों को बताते हुए सभी को शोध का वाचन के लिए बधाई दी। हिंदी अंग्रेजी और संस्कृत विभाग द्वारा आयोजित अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। कार्यक्रम के अंत में सभी शोध प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरित किया गया साथ ही वक्ताओं को स्मृति चिन्ह व श्रीफल भेट किया गया, कार्यक्रम का संचालन डॉ. आराधना गोस्वामी व आभार प्रदर्शन डॉ.मंजरी सिंह ने किया।
