ग्वालियर

सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी के बीच एक अच्छी खबर आई है। मध्य प्रदेश को 41 ऑर्थोपेडिक डॉक्टर्स मिल गए है। मप्र लोक सेवा आयोग से चयनित इन 41 अस्थि रोग विशेषज्ञों की अब जरूरत के हिसाब से अलग-अलग जिलों में पोस्टिंग की जानी है। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग ने अब इन्ही 41 आर्थोपेडिक डॉक्टरों से उनकी इच्छानुसार पोस्टिंग वाले जिलों के ऑप्शन मांगे है। स्वास्थ्य सेवाएं अपर संचालक ने जारी आदेश में एक फॉर्मेट जारी किया गया है। इस फॉर्मेट के आधार पर चिकित्सा विशेषज्ञों को 12 फरवरी तक 10 जिलों के ऑप्शन ऑनलाइन देना अनिवार्य किया गया है।

ऐसे में अगर कोई चिकित्सक इससे कम ऑप्शन देता है तो उसकी पोस्टिंग रिक्तता के आधार पर किसी भी जिले में कारने की बात कही गई है। स्वास्थ्य विभाग ने जो ऑनलाइन फॉर्मेट जारी किया है उसमें 12 बिंदु रखे गए है। इच्छानुसार 10 जिलों के नाम के अलावा कई जानकारी चिकित्सा विशेषज्ञों से मांगी गई है। इन्ही में से एक बिंदु में यह भी पूछा गया है कि अगर इन 41 में चिकित्सकों में से कोई पति-पत्नी हैं तो क्या वह एक ही जिले में पोस्टिंग चाहते हैं या नहीं?  ऐसा इसलिए क्योंकि अक्सर पोस्टिंग के बाद कई आवेदन इस संदर्भ में आते है।

प्राथमिकता के आधार पर पोस्टिंग
मनमुताबिक पोस्टिंग के लिए एक तरफ 41 अस्थिरोग विशेषज्ञों से जिलों के ऑप्शन ऑनलाइन मांगे गए हैं। वहीं दूसरी तरफ स्वास्थ्य महकमें ने यह भी साफ कर दिया है कि यह जरूरी नहीं कि ऑप्शन के आधार पर ही पोस्टिंग होगी। जितना संभव होगा उतना इच्छानुसार पोस्टिंग की जाएगी, लेकिन किस जिले में कितनी रिक्तता है उसे प्राथमिकता पर रखकर पदस्थापना की जाएगी।

डॉक्टरों की भारी कमी
रूरल हेल्थ स्टैटिक्स की 2021-22 की रिपोर्ट के मुताबिक मध्य प्रदेश की रैंकिंग देश में सबसे खराब स्थान पर है। यहां स्पेशलिस्ट डॉक्टरों के करीब 90 प्रतिशत पद खाली है। ऐसे में इन 41 चिकित्सा विशेषज्ञों के कार्यभार शुरू करने पर स्थिति में सुधार आएगा और मरीजों को लाभ मिल सकेगा।

By kgnews

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