छत्तीसगढ़

राजनांदगांव : पर्या तत्वों का संरक्षण संवर्धन से ही पृथ्वी संरक्षित – द्विवेदी

राजनांदगांव | शासकीय कमला देवी राठी महिला स्नातकोत्तर महिला महाविद्यालय राजनांदगांव के स्नातकोत्तर भूगोल विभाग द्वारा संस्था प्राचार्य डॉ. आलोक मिश्रा के संरक्षण में विश्व पृथ्वी दिवस पर विशेष जनजागरूकता कक्षा संगोष्ठी आयोजित की गई। इस अवसर पर सर्वप्रथम विभागाध्यक्ष डॉ. कृष्ण कुमार द्विवेदी ने विशेष विचार विमर्श में बताया कि सर्व जन-जन के लिए वसुंधरा पर एक स्वस्थ स्थाई पर्यावरण बना रहे इसी उद्देश्य को लेकर प्रतिवर्ष बाईस अपै्रल को पृथ्वी दिवस मनाया जाता है। वस्तुत: चतुर्दिक बढ़ते गहन पर्यावरण संकट के कारण हमारे जीवंत गृह पृथ्वी और उस पर निवासित मानव सभ्यता, जीव-जंतु तथा वानस्पितक प्रजातियों के अस्तित्व पर प्रश्न चिन्ह खड़ा हो गया है। इसके लिए सर्वजन को जागरूक होकर पहल करनी ही होगी। निरंतर घटते प्राकृतिक संसाधनों का दीर्घकाल तक संरक्षित करने तथा तीव्र विदोहन पर नियंत्रित करने की सामयिक आवश्यकता बन पड़ी है। वास्तविकता में पंच पर्या तत्वों आधारित पर्यावरण का संरक्षण से ही हमारे जीवंत गृह पृथ्वी का समग्र संरक्षण संभव है। इस अवसर पर स्नातकोत्तर वरिष्ठ कक्षा छात्राओं ने सर्व सुश्री छबिला – पर्यावरण घटक, दीपिका – पर्यावरणवाद, ज्ञानेश्वरी – प्राकृतिक प्रकोप, हसीना – मानव निर्मित प्रकोप, लक्ष्मी – पारिस्थितिकी तंत्र, नेहा – पर्यावरणीय प्रदूषण, राजेश्वरी – जल प्रदूषण, रेशमा – वायु प्रदूषण, शोभिनी – ध्वनि प्रदूषण, तरूणा – अन्य प्रदूषण, विजय लक्ष्मी – पर्यावरण जन जागृति आदि विषयों पर लिखित विचार रूप में विमर्श किया गया। इस महत्तम कक्षा संगोष्ठी के सार संक्षेप में डॉ. द्विवेदी द्वारा गौरवशाली भारतीय पर्यावरण संरक्षण की सनातन परंपराओं का उल्लेख करते हुए विशेष रूप से बताया कि हम सभी पृथ्वी को माता का दर्जा देते है। मानव सहित सभी जीव-जंतु और वनस्पितियों का भरण-पोषण करने वाली हमारी रत्नगर्भा पृथ्वी माता को देव तुल्य मानते हुए इसका संरक्षा करना अत्यंत आवश्यक दायित्व माना गया है। सदा सर्वदा से हमारी प्राचीन अवधारणा रही है कि  वसुंधरा पर हमेशा प्राकृतिक संतुलन कायम रहे। वर्तमान में बढ़ती जनसंख्या, घटते संसाधन और बिगड़ते पर्यावरण ने पृथ्वी के सुंदर, सलील, नैसर्गिक, स्वरूप को विकृत कर दिया है। आइये हम सभ मन प्राण से संकल्पित होकर पृथ्वी को बचाएं और मानव सभ्यता के भविष्य को सुरक्षित करें। इस अवसर पर पृथ्वी संरक्षण जनजागरूकता के संदेश और नारों का छात्राओं द्वारा वाचन भी किया गया। सहज सरल रूप में निरंतर चिंतन-मनन करते हुए पर्यावरण संरक्षण गतिविधियों द्वारा ही पृथ्वी को सुरक्षित रखा जा सकेगा।

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