भिलाई | ललित कला अकादमी के रीजनल सेन्टर खोलने के लिए छत्तीसगढ़ के कलाकारों को धैर्य बनाकर रखना होगा। एक समय ऐसा जरूर आएगा जब उनकी मांगे पूरी होगी। यह बातें सांसद विजय बघेल ने उनके निवास में मिलने आए अंचल के नामचीन कलाकारो के समक्ष कही। इस दौरान सुप्रसिद्ध चित्रकार हरीसेन, गिलबर्ट जोसफ, रोहिणी पाटणकर, विजय शर्मा, कला साहित्य मित्र समूह से शक्तिपद चक्रवर्ती, बबलू विश्वास, बारोम चक्रवर्ती, गीत वितान कलाकेन्द्र से मिथुन दास, ललित कला अकादमी समूह से कमलेश वर्मा, तरूण धोटे, प्रशांत क्षीरसागर, वीरेन्द्र पटनायक, इंद्रजीत सिंह, पूर्णानन्द देवांगन, हुलेश्वर देवांगन, रूपा साहू, ललेश्वरी साहू, यश दलवी, कांता देवी, देवकी टंडन, गुणेश्वरी, सरिता साहू, सुभद्रा गंधर्व, खैरागढ़ विश्वविद्यालय से गुंजन शर्मा, प्रीति साहू, धीरज साहू, रीतिक साहू तथा ललित कला अकादमी में छत्तीसगढ़ से प्रथम बोर्ड मेम्बर डॉ.अंकुश देवांगन उपस्थित थे।
ज्ञात हो कि भिलाई मे ललित कला अकादमी की स्थापना के लिए सांसद विजय बघेल ने निरंतर प्रयास किए हैं। जिससे छत्तीसगढ़ के कलाकारों में वैश्विक कलाकारों के समक्ष खड़े होने का भाव तैयार होने लगा है लेकिन यह मांग अब तक अधूरा है। मूर्तिकार अंकुश देवांगन ने सांसद निवास में वरिष्ठ कलाकारों की महती सभा को संबोधित करते हुए कहा कि सांसद के नेतृत्व में ही यह सपना हम लोगो ने देखा है कि भिलाई मे रीजनल सेन्टर हो। उनके कारण ही अकादमी के एक्जीक्यूटिव बोर्ड और जनरल काउंसिल मे प्रस्ताव लाया गया, दिल्ली से हाईपावर कमेटी का भी शहर में आगमन हुआ। यही नहीं सांसद के कारण ही भिलाई इस्पात संयंत्र ने अपने सुव्यवस्थित हाईस्कूल भवन देने की पेशकश की है। मुलाकात करने आए कलाकारों से सांसद ने कहा कि जब अकादमी की शीघ्र स्थापना नहीं हो पा रही है तब उन्हें धैर्य से काम लेना चाहिए। अनेक बार ऐसा होता है कि प्रयास असफल हो जाते हैं और इश्वरीय आशीर्वाद से वे सफल भी हो जाते हैं। संभव है इस विषय में भी ऐसा हो परन्तु हां हम प्रयास करने में कोई कसर नही छोड़ेंगे। कला साहित्य मित्र समूह से शक्तिपद चक्रवर्ती और बबलू विश्वास ने सांसद को बताया कि अकादमी स्थापना के लिए आपके द्वारा उठाए गए कदम की जितनी भी सराहना की जाए उतनी कम है। इसमें अब यही काम बचा है कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री दिल्ली जाकर केन्द्रीय संस्कृति मंत्री से मिले और विधानसभा चुनाव के घोषणापत्र में इस मांग को शामिल होने की जानकारी दे। और यह भी बताए कि घोषणापत्र चूंकि मोदी जी की गारंटी थी अतः उसे पूरा करना राज्य और केंद्र सरकार की जिम्मेदारी है। जिससे विरासत की समृद्धता संजोये छत्तीसगढ़िया कलाकारों की बहुप्रतीक्षित मांग पूरी होकर रहेगी। शक्तिपद चक्रवर्ती ने यह भी कहा कि अविभाजित मध्यप्रदेश में भिलाई सदैव से ही कला का केंद्र रहा है ऐसे में राष्ट्रीय संस्थान की स्थापना उसका हक है। गीत वितान केंद्र के मिथुन दास ने भी अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि सदा से कला के केन्द्र रहे भिलाई में अब कलात्मक गतिविधियां शून्य होती जा रही है। सुप्रसिद्ध चित्रकारद्वय हरीसेन जी, गिलबर्ट जोसफ तथा रोहिणी पाटणकर ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद से कलाकारों के कलाकृतियों का प्रदर्शन कम हो गया है। जबकि प्रदर्शनकारी कलाओं की गतिविधियाँ अविभाजित मध्यप्रदेश में ज्यादा थी। भारत भवन भोपाल में खैरागढ़ और भिलाई, रायपुर के कलाकारों का बोलबाला था। खैरागढ़ से आई हुई गुंजन शर्मा, प्रीति साहू तथा धीरज साहू ने भी छत्तीसगढ़ बनने के बाद कलाजगत में किए जा रहे कार्यों के प्रति निराशा प्रगट की है। सब कलाकारों ने सांसद से मुलाकात के दौरान एकस्वर में मांग की है कि मुख्यमंत्री अतिशीघ्र केंद्रीय संस्कृति मंत्री से मिलकर इस मांग को पूरा करे। तभी छत्तीसगढ़ी कला संस्कृति का सर्वांगीण विकास हो सकेगा।

By kgnews

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