छत्तीसगढ़ के जगदलपुर से करीब 40 किमी दूर भानपुरी का सिविल अस्पताल। यहां मौत के बाद भी शवों को घर पहुंचने का इंतजार करना पड़ता है। विधायक जी ने अस्पताल को शव वाहन तो दान कर दिया, लेकिन उसे चलाने के लिए ड्राइवर आज तक नहीं मिला। इसके कारण शवों को ले जाने के लिए मुख्यालय से वाहन बुलाया जाता है। इसके इंतजार में घंटों लग जाते हैं। जिसके परिजन सक्षम हैं, वे बैलगाड़ी या प्राइवेट वाहन मंगाते हैं और फिर शव ले जाकर उसका अंतिम संस्कार करते हैं। 

विधायक ने दान में दिया था शव वाहन
दरअसल, नारायणपुर से विधायक चंदन कश्यप ने करीब छह-सात माह पहले भानपुरी के सिविल अस्पताल को शव वाहन दान किया था। इसके बाद से वाहन अस्पताल परिसर में ही खड़ा हुआ है। उसे चलाने के लिए अब तक किसी भी ड्राइवर की नियुक्ति नहीं किया जा सकी है। 50 बिस्तरों वाले इस अस्पताल में जब किसी मरीज की मौत हो जाती है तो जगदलपुर से शव वाहन को बुलाया जाता है। उसे आने में दो घंटे तक लग जाते हैं, तब तक परिजन शव लिए इंतजार करते रहते हैं। 

35 किमी दूर कोंडागांव से मंगवाना पड़ता है वाहन
वाहन चालकों का कहना रहता है की जब पोस्टमार्टम शुरू होता है, उस समय सूचना देने पर जगदलपुर से निकलते हैं। कई बार जगदलपुर में शव वाहन नहीं होने के कारण लोहड़ीगुड़ा से भानपुरी के लिए भेजा जाता है। अगर वहां का वाहन भी व्यस्त है तो भानपुरी से करीब 35 किमी दूर कोंडागांव से शव वाहन को बुलवाया जाता है। हालांकि अस्पताल प्रभारी का कहना है की शव वाहन को चलाने के लिए ड्राइवर नहीं होने के कारण हाट बाजार से दो-तीन बाद चालकों को बुलवाया गया है। 

बैलगाड़ी, निजी वाहन पर निर्भर क्षेत्र के लोग
भारतीय जनता युवा मोर्चा मंडल महामंत्री भानपुरी के रामप्रसाद मौर्य ने बताया की 18 दिसंबर 2022 को विधायक चंदन कश्यप के द्वारा तो शव वाहन देकर फोटो खिंचवा लिए, लेकिन इसको चलाने के लिए अबतक एक भी ड्राइवर की व्यवस्था नहीं कर पाए। जिसके कारण क्षेत्र के लोगों को काफी परेशानी हो रही है। किसी की भी मृत्यु होने पर क्षेत्र के लोग बैलगाड़ी से लेकर निजी वाहन के अलावा जगदलपुर से आने वाले वाहनों पर निर्भर होना पड़ रहा है। यह काफी विडंबना की बात है। इस मामले को संज्ञान में लेते हुए जल्द से जल्द ड्राइवर की नियुक्ति करनी चाहिए।

By kgnews

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