महासमुंद, जिले में 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों में कुपोषण की रोकथाम हेतु राज्य एवं केंद्र सरकार की पोषण संबंधी योजनाओं के अंतर्गत निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। “राष्ट्रीय पोषण मिशन“ (पोषण अभियान) जैसे शासकीय कार्यक्रमों के साथ यूनिसेफ़ और एम्स रायपुर के स्टेट सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के सहयोग से सामुदायिक आधारित प्रबंधन कार्यक्रम (सीएमएएम) भी प्रभावी रूप से संचालित किया जा रहा है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य अति गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों को चिन्हित कर उन्हें पोषण सहायता प्रदान कर सामान्य स्वास्थ्य स्थिति में लाना है।
कार्यक्रम की गुणवत्ता और प्रभावशीलता सुनिश्चित करने हेतु नेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, दिल्ली के विशेषज्ञों द्वारा जिले में नियमित निरीक्षण किए जा रहे हैं। हाल ही में जिले के विकासखंड पिथौरा, बागबाहरा एवं महासमुंद ग्रामीण परियोजनाओं के अंतर्गत चयनित 6 आंगनवाड़ी केंद्रों का निरीक्षण किया गया। इस दौरान विशेषज्ञों ने अति गंभीर कुपोषित बच्चों की स्वास्थ्य स्थिति का मूल्यांकन किया, अभिभावकों को पोषण आहार की जानकारी दी तथा एएनएम, मितानिन और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के समर्पित कार्य की सराहना की। इन सतत निरीक्षणों और समन्वित प्रयासों के फलस्वरूप महासमुंद जिले में बाल कुपोषण की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार देखा जा रहा है। यह पहल बाल स्वास्थ्य और पोषण सुधार की दिशा में एक प्रेरणादायक मॉडल के रूप में उभर रही है।
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