CG : जनजातीय समुदाय की पारंपरिक व्यंजन हमारी परंपरा और सामाजिक एकजुटता का प्रतीकरू विधायक रायमुनी भगत…

जशपुरिया जायका कार्यक्रम में जनजातीय समुदायों द्वारा प्रदर्शित विभिन्न प्रकार के व्यंजनों को जानने उत्सुक दिखे लोग

स्वादिष्ट होने के साथ ही पौष्टिकता से भरपूर होते हैं यह व्यंजन

जशपुरनगर | छत्तीसगढ़ रजत महोत्सव  के अंतर्गत आज वशिष्ठ कम्युनिटी हाल में आयोजित जशपुरिया जायका कार्यक्रम में लोगों को जशपुर की संस्कृति में रची बसी आदिवासी समुदायों के पारंपरिक व्यंजनों को जानने और समझने का अवसर मिला। यहां पर जशपुर की स्थानीय जनजाति उरांव, गोंड, पहाड़ी कोरवा, बिरहोर, मुंडा, नगेशिया, कंवर, भूईहर, खैरवार और अगरिया जनजातियों के द्वारा प्रदर्शित की गई उनके पारंपरिक व्यंजनों ने सभी का ध्यान आकर्षित किया।

लोग इन व्यंजनों के बारे में जानने और समझने के लिए उत्सुक दिखाई दिए। पौष्टिकता और स्वादिष्ट से भरपूर ये व्यंजन इन जनजातीय समुदाय की परंपरा, संस्कृति और जीवनशैली को भी प्रदर्शित करती है। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि विधायक रायमुनी भगत सहित अन्य अतिथियों ने इन जनजातीय समुदायों द्वारा प्रदर्शित पारंपरिक व्यंजनों का अवलोकन किया। उन्होंने इन व्यंजनों का स्वाद भी चखा और सराहना भी की।

इस अवसर पर विधायक रायमुनी भगत ने अपने संबोधन में जनजातीय संस्कृति, खान-पान, पूजा पद्धति, पारंपरिक व्यंजनों को सहेजने पर जोर देते हुए कहा कि हमारी आदिवासी संस्कृति पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही है। आज के युवाओं को हमारी संस्कृति से परिचित कराने जशपुरिया जायका जैसे कार्यक्रम महत्वपूर्ण साबित होते हैं। उन्होंने कहा कि तीजा, जितिया, सोहराई, करमा सहित अन्य त्योहारों में अलग-अलग तरह के व्यंजन बनाए जाते हैं। त्योहारों के साथ ही विभिन्न पकवानों का आनंद हमारी परंपरा और सामाजिक एकजुटता का प्रतीक भी है। इन व्यंजनों के माध्यम से हमें अपनी जड़ों से जुड़ने और अपनी सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखने का अवसर मिलता है।

नगर पालिका अध्यक्ष अरविंद भगत ने कहा कि छत्तीसगढ़ अभी युवा है और तेजी से विकास के पथ पर आगे बढ़ रहा है। जशपुर की कला-संस्कृति, खानपान और पारंपरिक व्यंजनों को हमें सहेजते हुए पूरी दुनिया को इसके विशेषताओं से परिचित कराना है। जिला पंचायत उपाध्यक्ष शौर्य प्रताप सिंह जूदेव ने कहा कि यहां की जनजातीय समुदायों द्वारा बनाया गया व्यंजन काफी स्वादिष्ट और पौष्टिकता से भरपूर होता है। अन्य क्षेत्रों के लोगों को भी इसका स्वाद काफी भाता है। हर त्योहारों के अनुसार यहां पर अलग-अलग तरह के व्यंजन बनाए जाते हैं, जो कि यहां की समृद्ध संस्कृति को भी प्रदर्शित करता है।     

जिला पंचायत सीईओ अभिषेक कुमार ने कहा कि जशपुरिया जायका कार्यक्रम का उद्देश्य जनजातीय समुदायों के पारंपरिक व्यंजनों के  महत्व के बारे में ज्यादा से ज्यादा लोगों को बताना है, ताकि यहां की संस्कृति और खानपान के बारे में पूरी दुनिया को जानकारी हो सके। इस अवसर पर पार्षदगण राजेश कुमार गुप्ता, शैलेन्द्री यादव, कंचन बैरागी, विजेता भगत, शशि भगत, कमला बाई, और शबनम खातून, एसडीएम विश्वास राव मस्के, जिला कार्यक्रम अधिकारी अजय शर्मा, अधिकारी-कर्मचारी सहित बड़ी संख्या में महिलाएं मौजूद थी।

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