ताप्ती बना मध्यप्रदेश का पहला कंजर्वेशन रिजर्व, जानें नेशनल पार्क से क्या है फर्क

भोपाल 
मध्यप्रदेश के पहले कंजर्वेशन रिजर्व 'ताप्ती' को सरकार ने हरी झंडी दे दी है. यह कंजर्वेशन रिजर्व 250 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है, जिसमें रिजर्व और संरक्षित वन क्षेत्र शामिल होगा. यह कंजर्वेशन रिजर्व क्षेत्र सतपुड़ा और मेलघाट टाइगर रिजर्व के बीच वन्यजीव कॉरिडोर का हिस्सा है. राज्य सरकार ने इसका नोटिफिकेशन जारी कर दिया है और इसकी सीमाएं भी घोषित कर दी हैं. इसी के साथ एक बार फिर मध्य प्रदेश के वन्य जीवों का घर लगातार बड़ा हो रहा है.

यह होगी कंजर्वेशन रिजर्व की सीमाएं

मध्यप्रदेश के पहले कंजर्वेशन रिजर्व ताप्ती की सीमाएं भी निर्धारित कर दी गई हैं. यह कंजर्वेशन रिजर्व दक्षिण और पश्चिम वन मंडल बैतूल की 3 तहसील बैतूल, भीमपुर और भैंसदेही में बना है. इसमें ताप्ती, चिचोली और तावड़ी वन क्षेत्र को शामिल किया गया है. इस रिजर्व क्षेत्र में टाइगर, तेंदुआ, जंगली कुत्ते, बायसन जैसे कई वन्य जीव मौजूद हैं.

जानें नेशनल पार्क, वाइल्ड लाइफ सेंक्चुरी और कंजर्वेशन रिजर्व में अंतर 

    ताप्ती कंजर्वेशन रिजर्व का कुल क्षेत्रफल 250 वर्ग किलोमीटर होगा.

    इसमें 224.844 वर्ग किलोमीटर रिजर्व फॉरेस्ट और 25.156 वर्ग किलोमीटर संरक्षित वन क्षेत्र शामिल है.

    यह पहला कंजर्वेशन रिजर्व बन गया है, जो दो टाइगर रिजर्व सतपुड़ा और मेलघाट टाइगर रिजर्व को जोड़ता है.

    रिजर्व में टाइगर, लैपर्ड जैसे वन्य जीवों के अलावा ब्लैक बक, चीतल और जंगली उल्लू भी देखे जा सकते हैं.

यह होगा रिजर्व से फायदा

एपीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ ए. कृष्णामूर्ति कहते हैं, '' कंजर्वेशन रिजर्व टाइगर रिजर्व और सेंक्चुरी की तरह एक संरक्षित वन क्षेत्र है. इससे बाघ सहित दूसरे वन्य प्राणियों को संरक्षण मिलेगा. यह रिजर्व दो टाइगर रिजर्व के बीच कॉरिडोर का काम करेगा. इससे स्थानीय लोगों को नुकसान के स्थान पर फायदा होगा. इस रिजर्व के बनने से इस क्षेत्र में ईको टूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा. स्थानीय लोगों के वनोपज संग्रह के अधिकार खत्म नहीं होंगे. वहीं, आदिवासी पहले के तरह तेंदुपत्ता, चिरौंजी, सूखी लकड़ी, गोंद आदि एकट्ठा कर सकेंगे.''

क्या होता है अलग-अलग रिजर्व में अंतर?

आमतौर पर सवाल उठता है कि आखिर नेशनल पार्क, वाइल्ड लाइफ सेंक्चुरी और कंजर्वेशन रिजर्व में क्या अंतर होता है? तो बता दें नेशनल पार्क में मानवीय गतिविधियों पर पूरी तरह से प्रतिबंध होता है. इस क्षेत्र में लकड़ी काटने, वनोपज इकट्ठा करने जैसी कोई भी गतिविधि नहीं की जा सकती. जबकि वाइल्ड लाइफ सेंक्चुरी में कुछ सीमित मानवीय गतिविधियां जैसे जानवरों को चराने या स्थानीय उपयोग नियंत्रित तरीके से किए जा सकते हैं.

जबकि कंजर्वेशन रिजर्व का क्षेत्र बफर जोन जैसा होता हैं. यहां स्थानीय समुदाय की सहभागिता की मदद से वन्य जीवों ओर वन्य क्षेत्र का संरक्षण किया जाता है. इस क्षेत्र में रहने वालों की आजीविका को भी महत्व दिया जाता है. 

Admin

Share
Published by
Admin

Recent Posts

25 हजार मीट्रिक टन से अधिक रासायनिक उर्वरक उपलब्ध, प्रशासन की कड़ी निगरानी में वितरण व्यवस्था

25 हजार मीट्रिक टन से अधिक रासायनिक उर्वरक उपलब्ध, प्रशासन की कड़ी निगरानी में वितरण व्यवस्था

रायपुर मुंगेली जिले में खरीफ सीजन 2026 की शुरुआत के साथ ही जिले के किसानों…

2 hours ago
खरीफ सीजन की तैयारियां तेज, किसानों को मांग अनुसार उपलब्ध कराया जा रहा खाद और बीज

खरीफ सीजन की तैयारियां तेज, किसानों को मांग अनुसार उपलब्ध कराया जा रहा खाद और बीज

रायपुर जिला रायगढ़ में मानसून की दस्तक से पहले जिले के किसान आगामी खरीफ सीजन…

2 hours ago
मुख्यमंत्री ने बिहान की दीदियों को सौंपी आजीविका ग्रामीण एक्सप्रेस योजना के तहत टाटा मैजिक वाहन

मुख्यमंत्री ने बिहान की दीदियों को सौंपी आजीविका ग्रामीण एक्सप्रेस योजना के तहत टाटा मैजिक वाहन

रायपुर  सुशासन तिहार 2026 के अंतर्गत ग्राम चेरपाल में आयोजित जिला स्तरीय जनसमस्या निवारण शिविर…

2 hours ago
उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन ने कोरबा में किया विकास कार्येा का भूमिपूजन

उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन ने कोरबा में किया विकास कार्येा का भूमिपूजन

रायपुर उद्योग मंत्री  लखनलाल देवांगन ने कोरबा में किया विकास कार्येा का भूमिपूजन प्रदेश में…

2 hours ago
स्व. बाबूलाल गौर अजेय नेता थे, उनका शताब्दी वर्ष मनाएंगे भव्यतापूर्वक : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

स्व. बाबूलाल गौर अजेय नेता थे, उनका शताब्दी वर्ष मनाएंगे भव्यतापूर्वक : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मंगलवार शाम को पूर्व मुख्यमंत्री स्व. बाबूलाल गौर की जयंती…

2 hours ago