कल की चुनौतियों का सामना करने के लिये तैयार किया जा रहा है बच्चों को

स्कूल शिक्षा मंत्री श्री उदय प्रताप सिंह का वक्तव्य

भोपाल 
स्कूल शिक्षा एवं परिवहन मंत्री श्री उदय प्रताप सिंह ने कहा है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के विज़न-2047 की ओर बढ़ते हुए देश के अनुरूप मध्यप्रदेश को भी विकास की गति दी जायेगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में विकसित मध्यप्रदेश के सपने को साकार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति में कक्षा-5वीं तक मातृभाषा पर जोर दिया गया है और व्यावसायिक शिक्षा को छात्रों के व्यावहारिक कौशल के हिसाब से बनाया गया है। प्रदेश में तकनीकी आधारित शिक्षा में प्रौद्योगिक डिजिटल शिक्षा को महत्व दिया गया है। मंत्री श्री सिंह बुधवार को विधानसभा में विशेष सत्र को संबोधित कर रहे थे। अतीत की चर्चा करते हुए मंत्री श्री सिंह ने बताया कि राज्य की स्थापना के समय साक्षरता दर 21.41 प्रतिशत हुआ करती थी, जो आज लगभग 75 प्रतिशत तक पहुँच गई है। यह किसी एक योजना के कारण नहीं, बल्कि पूर्ववर्ती सरकारों के लगातार शिक्षा गुणवत्ता में सुधार, निवेश और प्रतिबद्धता का स्पष्ट उदाहरण है।

स्कूल शिक्षा विभाग

स्कूल शिक्षा मंत्री ने सदन में जानकारी दी कि प्रदेश में वर्ष 2003-04 में 4495 हाई स्कूल और 4211 हायर सेकेण्डरी स्कूल थे, जिनमें कक्षा-9 से 12 तक 18 लाख 79 हजार विद्यार्थी अध्ययनरत थे। आज वर्ष 2025-26 में यह संख्या बढ़कर 22.56 लाख हो चुकी है। पिछले दो दशकों में 4670 माध्यमिक शालाओं को हाई स्कूल में तथा 1991 हाई स्कूलों को हायर सेकेण्डरी में उन्नयन किया गया है। नि:शुल्क साइकिल योजना में वर्ष 2004-05 में लाभार्थियों की संख्या 34 हजार से बढ़कर वर्ष 2024-25 में 4 लाख 90 हो गई है। लैपटॉप योजना में वर्ष 2009-10 में लाभार्थी 473 से बढ़कर आज 94 हजार 300 हो गये हैं। नि:शुल्क पाठ्य-पुस्तकों के वितरण में लाभार्थी एक लाख 20 हजार हुआ करते थे, जिनकी संख्या अब बढ़कर 21 लाख 70 हजार हो गयी है। मुख्यमंत्री स्कूटी योजना में वर्ष 2022-23 में 7832 विद्यार्थियों को लाभ दिया गया है। उन्होंने बताया कि प्राथमिक स्तर पर ड्रॉपआउट दर शून्य हो गई है। समग्र आईडी के माध्यम से 90 प्रतिशत बच्चों की ट्रेकिंग पूर्ण की जा चुकी है। बच्चों को दी जाने वाली सुविधाएँ स्कूल के सत्र शुरू होने के साथ ही दिये जाने के प्रयास किये गये हैं। प्रदेश में 30 हजार 281 शिक्षक पदों पर भर्ती प्रक्रिया प्रगति पर है। स्कूलों में 76,325 अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति की गई है। विभाग ने पहली बार 20 हजार से अधिक अतिशेष शिक्षकों का तर्कसंगत स्थानांतरण किया है। प्रदेश में बोर्ड परीक्षा परिणामों में भी सुधार हुआ है। कक्षा-10 का उत्तीर्ण प्रतिशत 56 प्रतिशत से बढ़कर 74.56 प्रतिशत तथा कक्षा-12 का 63 प्रतिशत से बढ़कर 76.22 प्रतिशत हो गया है। उल्लास नवभारत साक्षरता कार्यक्रम में 42 लाख के लक्ष्य के विरुद्ध 62 लाख 80 हजार को साक्षर करने की उपलब्धि प्राप्त की गयी है।

कौशल विकास एवं रोजगार
मंत्री श्री सिंह ने बताया कि प्रदेश में इस बार आईटीआई में 94.5 प्रतिशत एडमिशन हुआ है, जिसमें पिछले वर्ष से 8 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इन संस्थानों में प्रशिक्षण पाने वाली महिलाओं की संख्या 12179 हो गयी है। प्रदेश के आईटीआई में 8 राज्यों के विद्यार्थियों ने भी प्रवेश लिया है। उन्होंने बताया कि 20 वर्षों में प्रदेश में सरकारी आईटीआई की संख्या 133 से बढ़कर 290 हो गयी है। सीटों की संख्या भी बढ़कर 52 हजार 248 हो गयी है। आईटीआई में एक लाख बच्चे शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।

तकनीकी शिक्षा
मंत्री श्री सिंह ने बताया कि डिप्लोमा पाठ्यक्रम को कक्षा-12वीं के समतुल्य घोषित किये जाने से शैक्षणिक सत्र वर्ष 2025-26 में पॉलीटेक्निक महाविद्यालय के प्रवेश में 21.38 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गयी है। मुख्यमंत्री मेधावी विद्यार्थी योजना में वर्ष 2024-25 में 78 हजार 218 मेधावी विद्यार्थियों को 750 करोड़ रुपये की राशि वितरित की गयी है।

उच्च शिक्षा
मंत्री श्री सिंह ने बताया कि शिक्षा किसी भी समाज की रीढ़ होती है। उच्च शिक्षा वह शक्ति है, जो युवाओं को केवल रोजगार नहीं, बल्कि दृष्टि, दिशा और नेतृत्व प्रदान करती है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2024 में गुना, खरगौन और सागर जैसे क्षेत्रों में नए विश्वविद्यालयों की स्थापना की गई है। इन विश्वविद्यालयों ने जनजातीय ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों के युवाओं के लिये उच्च शिक्षा के नये द्वार खोले हैं। पिछले 2 वर्षों में उच्च शिक्षा के लिये 1150 करोड़ रुपये से अधिक का प्रावधान किया गया है। प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस की परिकल्पना ने प्रत्येक जिले में गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा को सुलभ बनाया है। नवाचार और अनुसंधान से हमारे महाविद्यालय केवल नौकरी खोजने वाले नहीं, बल्कि नौकरी देने वाले संस्थान बनते जा रहे हैं। प्रदेश के कॉलेजों में डिजिटल शिक्षा और ई-गवर्नेंस को बढ़ावा दिया जा रहा है। छात्राओं के लिये गाँव की बेटी और प्रतिभा किरण जैसी योजनाएँ हमारी सरकार की संवेदनशीलता को दर्शाती हैं। स्कूल शिक्षा मंत्री श्री सिंह ने बताया कि आने वाले 3 वर्षों में उच्च शिक्षा में डिजिटल शिक्षा का शत-प्रतिशत क्रियान्वयन किया जायेगा। उच्च शिक्षा विभाग द्वारा आईआईटी नई दिल्ली से टायअप कर प्लेसमेंट किया जा रहा है। आईआईटी बॉम्बे से उच्च शिक्षा विभाग द्वारा एमओयू किया जा रहा है। उच्च शिक्षा विभाग नई शिक्षा नीति के द्वितीय चरण में काम कर रहा है, जो ऐतिहासिक उपलब्धि है।

 

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