खैरागढ़, ग्राम खैरबना में राजपरिवार के द्वारा 26 दिसंबर से 3 जनवरी तक आयोजित संगीतमय श्रीमद् भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ सप्ताह न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र बना हुआ है, बल्कि अपने बेबाक विचारों के कारण चर्चा का विषय भी बन गया है। प्रतिदिन दोपहर 1 बजे से आचार्य नरेंद्र नयन शास्त्री चाय वाले बाबा से कथा सुनने दूर-दराज के राज्यों से श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। कथा के साथ-साथ सुबह 9 बजे लगने वाला आचार्य का दिव्य दरबार विशेष है। यहां छत्तीसगढ़ सहित अन्य राज्यों से लोग बाबा से मार्गदर्शन ले रहे हैं।

मंगलवार को आयोजित पत्रकार वार्ता में आचार्य नरेंद्र नयन शास्त्री ने धर्म, सनातन, कथावाचकों और राजनीति के संबंधों पर अपनी बात रखी। कहा कि आज देश में सनातन हवा में तैर रहा है, लेकिन धर्म और पाखंड के बीच का फर्क समझना जरूरी है। पहले 100 लोग कथा सुनते थे तो उनके भीतर अध्यात्म जागृत हो जाता था, आज लाखों सुन रहे हैं, फिर भी अध्यात्म नहीं जाग रहा। कथावाचकों द्वारा फीस न लेने के दावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि लाखों की भीड़ और करोड़ों के पैकेज आडंबर का प्रमाण हैं। कथा के दौरान राजनेताओं के सम्मान के लिए कथा रोकने की परंपरा को आचार्य ने व्यास पीठ का अपमान बताया।

पं. प्रदीप मिश्रा को कथावाचक मानने से इनकार: आचार्य नरेंद्र नयन ने कहा कि वे पं. प्रदीप मिश्रा को कथावाचक ही नहीं मानते। जो व्यक्ति फीस न मिलने पर पूरी कथा रद्द कर दे जो धर्म और अध्यात्म को व्यापार का केंद्र बना दे, वह कथावाचक नहीं हो सकता। आचार्य ने बागेश्वर धाम सरकार पं. धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री पर कहा कि उनकी नजर में वे केवल कथावाचक हैं, ज्योतिषी नहीं। चावल देखकर भविष्य बताना मेरी सिद्धि और सनातन परंपरा का हिस्सा है, जो सदियों से चली आ रही है। आयोजनकर्ता आयश सिंह ने कहा कि आचार्य नरेंद्र नयन किसी भी प्रकार की फीस या दक्षिणा की मांग नहीं करते जो भी दान मिलता है, वह बेटियों की शिक्षा और विवाह में लगाया जाता है।

By kgnews

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