CG : आत्मसमर्पित नक्सलियों के समग्र पुनर्वास की दिशा में सशक्त पहल

पुनर्वास केन्द्र में 10 दिवसीय कृषि उन्मुख कार्यशाला का सफल एवं प्रेरणादायी आयोजन

नारायणपुर, कलेक्टर नम्रता जैन के निर्देशानुसार एवं जिला प्रशासन के मार्गदर्शन में आत्मसमर्पित नक्सलियों के सामाजिक, आर्थिक एवं व्यावसायिक पुनर्वास को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से कृषि आधारित आजीविका को प्रोत्साहित करने हेतु एक 10 दिवसीय विशेष कृषि कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यशाला दिनांक 22 से 31 दिसम्बर 2025 तक जिला परियोजना लाइवलीहूड कॉलेज, नारायणपुर (गरांजी) में स्थित पुनर्वास केन्द्र में सुव्यवस्थित रूप से संपन्न हुई।

इस कार्यशाला का प्रमुख उद्देश्य आत्मसमर्पित नक्सलियों को कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने, उन्हें आधुनिक एवं वैज्ञानिक कृषि तकनीकों से अवगत कराने, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के साथ आजीविका के स्थायी साधन उपलब्ध कराने तथा मुख्यधारा के समाज से सम्मानजनक ढंग से जोड़ना रहा। प्रशिक्षण कार्यक्रम को इस प्रकार तैयार किया गया, जिससे प्रतिभागियों को सैद्धांतिक ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक एवं स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप जानकारी प्राप्त हो सके।

कार्यशाला के दौरान आत्मसमर्पित हितग्राहियों को खाद्य पदार्थों के विभिन्न समूहों एवं संतुलित आहार का महत्व, पोषण संबंधी आवश्यकताएँ, मृदा स्वास्थ्य एवं मृदा संरक्षण की आधुनिक विधियाँ, मृदा परीक्षण एवं उर्वरता प्रबंधन, कृषि में लाख उत्पादन एवं उसकी आर्थिक संभावनाएँ, विभिन्न फसलों में होने वाले पौध रोगों की पहचान एवं नियंत्रण, उन्नत एवं उपयोगी कृषि यंत्रों की जानकारी, गुणवत्तायुक्त बीजों का चयन एवं उनका महत्व, कृषि कीटों की पहचान एवं उनके समन्वित प्रबंधन, जल एवं मृदा प्रबंधन की वैज्ञानिक तकनीकें जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तारपूर्वक प्रशिक्षण प्रदान किया गया।

उक्त 10 दिवसीय कार्यशाला में लिंगो मुदियाल कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र, केरलापाल (नारायणपुर) के अनुभवी एवं विशेषज्ञ कृषि वैज्ञानिकों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। महाविद्यालय की कृषि विशेषज्ञ डॉ. रत्ना नशीने एवं अन्य शिक्षकों द्वारा सरल भाषा, स्थानीय उदाहरणों, व्यावहारिक अनुभवों एवं संवादात्मक शैली में प्रशिक्षण दिया गया, जिससे प्रतिभागियों को विषयों को गहराई से समझने एवं अपनाने में विशेष सहायता मिली।

See also  CG में 5 दिन मांस-मटन की बिक्री पर रोक, उल्लंघन करने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई

कार्यशाला के दौरान आत्मसमर्पित नक्सलियों ने अत्यंत उत्साह, अनुशासन एवं सक्रिय सहभागिता के साथ प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग लिया। प्रतिभागियों द्वारा कृषि से संबंधित अपनी जिज्ञासाओं, समस्याओं एवं भविष्य की योजनाओं को विशेषज्ञों के समक्ष रखा गया, जिनका समाधान विशेषज्ञों द्वारा तत्परता से किया गया। इस संवादात्मक प्रक्रिया ने प्रशिक्षण को और अधिक प्रभावी, उपयोगी एवं प्रेरणादायी बनाया।


यह 10 दिवसीय कृषि कार्यशाला आत्मसमर्पित नक्सलियों के कौशल विकास, आत्मविश्वास निर्माण एवं आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर सिद्ध हुई है। कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश स्पष्ट रूप से सामने आया कि शासन एवं जिला प्रशासन आत्मसमर्पण करने वाले व्यक्तियों को केवल पुनर्वास ही नहीं, बल्कि सम्मानजनक, स्थायी एवं आत्मनिर्भर भविष्य प्रदान करने के लिए सतत प्रयासरत है।


जिला प्रशासन द्वारा भविष्य में भी इस प्रकार के कृषि, कौशल विकास एवं स्वरोजगार उन्मुख प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन कर आत्मसमर्पित नक्सलियों के पुनर्वास की प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी, स्थायी एवं समाजोपयोगी बनाने की योजना तैयार की गई है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *