राजनांदगांव , ठंड बढ़ने के कारण बच्चे सर्दी-खांसी और वायरल फीवर की चपेट में है। अधिकतर बच्चों में एक जैसे और निमोनिया के लक्षण भी मिल रहे। जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज के बच्चा वार्ड के अधिकतर बेड में बच्चों को भर्ती कर इलाज किया जा रहा है।
आम दिनों के मुकाबले बच्चा वार्ड की ओपीडी और आइपीडी में मरीजों की संख्या बढ़ गई। साथ ही ठंड बढ़ने से बुजुर्गों में यहीं समस्या है। ठीक होने में पांच दिन लग रहे है। मंगलवार दोपहर जिला अस्पताल के बच्चा वार्ड की ओपीडी में बड़ी संख्या में पालक बच्चों को लेकर पहुंचे थे।
बच्चा वार्ड के चाइल्ड स्पेशलिस्ट डॉ. कमलेश जंघेल ने बताया अभी पीक सीजन चल रहा है। बच्चों को ठंड से बचाना बेहद जरूरी है। गर्म कपड़ों का उपयोग करें, रात में ओढ़ा कर सुलाना चाहिए, बीच-बीच में निगरानी करें, उबले पानी का सेवन करें। ठंडी खाद्य सामग्री आइसक्रिम, कोल्ड्रिंग से बचे।
डॉक्टरों से जांच और सलाह पर दवा देनी चाहिए। कुछ बच्चों में निमोनिया के लक्षण सामने आ रहें है। बच्चों की कंडिशन अनुसार मशीन से भांप देने की सलाह दे रहे हैं। बेहद जरूरी नहीं होने पर ठंड में छोटे बच्चों के साथ लंबे सफर से बचें, बच्चों की डाइट पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।
मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभाग के प्रमुख एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. प्रकाश खुंटे ने बताया बुजुर्गों में सर्दी-खांसी, निमोनिया सहित अस्थमा के लक्षण मिल रहे हैं। ठंड में पैरालिसिस और अस्थमा हृदयाघात की आशंका बढ़ जाती है। बुजुर्गों को ठंड से बचाने गर्म कपड़ों और जरूरत पड़ने पर अलावा का सहारा लेना जरूरी है।
ठंड में रक्त कोशिकाएं सिकुड़ने से ब्लड प्रेशर बढ़ता है। हृदय में भार पड़ने से अटैक का खतरा बना रहता है। फ्लू, सांस की समस्या दिल की कार्यक्षमता को प्रभावित करती है। योग-व्यायाम करें व पानी उबाल कर लें तो कई समस्या अपने आप दूर हो जाएगी।
