गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही
लगभग सालभर के अंतराल के बाद अमरकंटक ज्वालेश्वर मार्ग पर बाघ की चहल कदमी दिखाई दी है। अमरकंटक से वापस लौट रहे स्थानीय शिक्षक ने बाघ के मूवमेंट को अपने मोबाइल फोन में कैद किया है। वीडियो में बाघ सड़क के बीचों बीच चलता दिखाई दे रहा है। एक सियार भी बाघ के आसपास दिखाई दे रहा है। वीडियो में देखा जा सकता है कि सड़क के दोनों ओर नुकीली कांटेदार तार होने के कारण बाघ उसे पार नहीं कर पा रहा है और बार-बार सड़क पर आना-जाना कर रहा है।
बता दें कि बीते वर्ष कान्हा नेशनल पार्क से भटकर एक बाघिन ने मरवाही वनमंडल के मरवाही के जंगलों और गौरेला रेंज से जुड़े जंगलो में काफी समय बिताया था, जो काफी कौतूहल का विषय बन गया था। इस बाघिन को बड़ी आसानी के साथ उस दौरान देखा जा सकता था, इसी बाघिन ने मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ की सीमा के ज्वालेश्वर क्षेत्र में लगभग 15 दिनों तक विचरण करते हुए देखी गई थी, जिसका बाद में रेस्क्यू कर लिया गया था।
बीती रात 5 फरवरी को शिक्षक योगेश बिसेन परिवार सहित अमरकंटक से वापस लौट रहे थे, इसी दौरान रास्ते मे एक बड़े जानवर बाघ को देख कर टिठक गए। उन्होंने तत्काल अपना फ़ोन निकालकर इस बाघ का वीडियो बना लिया। इस बाघ के आसपास एक सियार भी था। माना जा रहा है कि अचानक मार्ग में बाघों की संख्या बढ़ने के कारण नए इलाके की तलाश में बाघ यहां पहुंच गया होगा।
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