राजनांदगांव । कृषि विभाग के माध्यम से मृदा की उर्वरता को बनाये रखते हुए टिकाऊ खेती के साथ कृषकों की आय में वृद्धि हेतु जिले में जैविक खेती, परम्परागत कृषि विकास योजना एवं राष्ट्रीय प्राकृतिक मिशन जैसी महत्वाकांक्षी योजनाएं संचालित की जा रही है। जिले में वर्ष 2023 की स्थिति में मात्र 500 हेक्टेयर प्रमाणित जैविक खेती का रकबा था, जो वर्ष 2024-25 एवं 2025-26 में बढ़कर 3260 हेक्टेयर तक पहुंच चुका है। कृषकों के उत्पादों के प्रमाणीकरण हेतु 3 वर्ष की परिवर्तन अवधि में प्रमाणीकरण प्रक्रिया पूर्ण करने हेतु रिजनल काउंसिल द्वारा प्रमाण पत्र प्रदाय किया गया है।
प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना से जिले में सिंचाई क्षेत्र में वृद्धि एवं जल उपयोग दक्षता को बढ़ाने में कारगर
प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना अंतर्गत विगत वर्षों में ड्रीप एवं स्प्रिंकलर के माध्यम से 22405 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई किया जाता रहा है, जो वर्ष 2024-25 एवं 2025-26 में बढ़कर 24194 हेक्टेयर हुआ है। साथ ही किसान समृद्धि योजना के माध्यम से नलकूप खनन एवं प्रतिस्थापन, सौर सुजला योजना के माध्यम से सोलर पैनल स्थापना तथा शाकम्भरी योजना के माध्यम से सिंचाई पंप वितरण कर 16988 हेक्टेयर क्षेत्र में अतिरिक्त सिंचाई रकबा का विस्तार हुआ है। साथ ही जल संरक्षण एवं संवर्धन संरचना (मेसनरी पक्का चेकडेम) द्वारा वर्ष 2024-25 में 15 चेकडेम निर्माण द्वारा 330 हेक्टेयर तथा वर्ष 2025-26 में 12 चेकडेम निर्माण से 264 हेक्टेयर वर्षा आश्रित क्षेत्रों में सिंचाई सुविधा का विस्तार किया गया है।
राष्ट्रीय खाद्यान्न सुरक्षा मिशन तथा राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन के माध्यम से दलहन एवं तिलहन आत्मनिर्भरता का किया जा रहा प्रयास
राजनांदगांव जिले में विगत वर्ष सोयाबीन सहित अन्य तिलहन फसलों का रकबा मात्र 2100 हेक्टेयर था। जिसे वर्ष 2024-25 एवं 2025-26 में राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन के माध्यम फसल प्रदर्शन एवं प्रमाणित बीज वितरण की सुदृढ़ व्यवस्था कर 3200 हेक्टेयर तक वृद्धि किया गया। इसी प्रकार रबी में चना, उड़द, मूंग एवं तिवड़ा फसलों का रकबा जहां विगत वर्ष तक 55000 था। जिसे वर्ष 2025-26 में बढ़ाकर 60000 हेक्टेयर किया गया।
फसल चक्र परिवर्तन अभियान के माध्यम से ग्रीष्मकालीन धान के स्थान पर दलहन, तिलहन एवं मक्का फसल का बढ़ा रकबा
जिला राजनांदगांव में जल संरक्षण एवं संवर्धन को दृष्टिगत रखते हुए मिशन जल रक्षा का संचालन किया जा रहा है। जिसके माध्यम से जिले में अधिक जल मांग वाली फसलों जैसे ग्रीष्मकालीन धान को हतोत्साहित कर कम जल मांग एवं अधिक मुनाफा देने वाली फसलें चना, उड़द, मूंग, तिवड़ा, मटर एवं मक्का को प्रोत्साहित किया गया। जिसका परिणाम यह रहा कि विगत वर्ष की स्थिति में 9336 हेक्टेयर ग्रीष्मकालीन धान का रकबा था। जिसे वर्ष 2024-25 एवं 2025-26 में अभियान के माध्यम से जनजागरूकता व मैदानी अधिकारियों के प्रयास से कम करते हुए अद्यतन 4000 हेक्टेयर तक सीमित किया जा चुका है।

By kgnews

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