खेल-खेल में बच्चों ने सीखीं मानसिक मजबूती की बारीकियां
जगदलपुर, बस्तर जिला प्रशासन द्वारा बच्चों के मन से परीक्षा की तैयारी को लेकर होने वाले मानसिक तनाव को दूर करने और मानसिक तौर पर मजबूत बनाने का कार्य किया जा रहा है। इसी कड़ी में बुधवार को जगदलपुर स्थित प्रयास आवासीय विद्यालय में बच्चों के सर्वांगीण विकास और मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के लिए आयोजित जागरूकता सत्र में किताबी ज्ञान से इतर व्यावहारिक गतिविधियों के माध्यम से जीवन जीने की कला सिखाई गई। कलेक्टर आकाश छिकारा के मार्गदर्शन में जिला मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम और श्स्पर्श क्लिनिक के विशेषज्ञों द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में छात्रों को मानसिक रूप से सशक्त बनाने के लिए कई रोचक और मनोरंजक गतिविधियों का सहारा लिया गया, जिससे सत्र का वातावरण अत्यंत जीवंत और उत्साहजनक बन गया।
कार्यशाला के दौरान चाइनीज व्हिस्पर जैसे खेल के माध्यम से छात्रों को प्रभावी संवाद और संचार कौशल का महत्व समझाया गया। इस खेल के जरिए बच्चों ने सीखा कि किस तरह जानकारी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक पहुँचते-पहुँचते बदल जाती है और जीवन में स्पष्ट संवाद क्यों आवश्यक है। वहीं, सकारात्मक और नकारात्मक सोच के प्रभाव को समझाने के लिए गुब्बारे फुलाने की एक विशेष गतिविधि कराई गई। इसमें बच्चों को यह बोध कराया गया कि सकारात्मक विचार किस तरह हमारे व्यक्तित्व का विस्तार करते हैं, जबकि नकारात्मकता हमें मानसिक रूप से कमजोर कर सकती है।
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण चिकन डांस जैसी गतिविधियां रहीं, जिन्होंने छात्रों के बीच के संकोच को दूर कर उन्हें अभिव्यक्ति की आजादी का अनुभव कराया। इन गतिविधियों के माध्यम से विशेषज्ञों ने तनाव प्रबंधन के गुर सिखाते हुए बताया कि खेल और रचनात्मकता किस तरह मानसिक बोझ को हल्का करने में सहायक होते हैं। सामुदायिक नर्सिंग अधिकारी रूपेश मसीह और क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट आकाश मिंज ने बताया कि छात्रावास में रहने वाले बच्चों के लिए अपनी भावनाओं को व्यक्त करना बेहद जरूरी है। इन खेलों ने बच्चों को एक ऐसा सुरक्षित मंच प्रदान किया जहाँ वे अपनी छोटी-बड़ी उलझनों को साझा कर सके।
सत्र के अंत में कक्षा 9वीं की छात्रा लतिका आचार्य सहित अन्य विद्यार्थियों ने इन गतिविधियों की सराहना करते हुए कहा कि खेल-खेल में मिली इस शिक्षा ने जीवन के प्रति उनका नजरिया बदल दिया है। विद्यार्थियों ने यह अनुभव साझा किया कि अब वे परीक्षाओं के दबाव और दैनिक जीवन की चुनौतियों को धैर्य और सही रणनीति के साथ संभालने में अधिक सक्षम महसूस कर रहे हैं। विद्यालय प्रबंधन ने इस पहल को छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को सँवारने की दिशा में एक बड़ा कदम बताया है, जिससे न केवल बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ा है बल्कि उन्हें एक खुशहाल और तनावमुक्त शैक्षणिक जीवन जीने की नई प्रेरणा भी मिली है।
