एमसीबी / जिले में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के पश्चात अब उठाव कार्य ने उल्लेखनीय गति पकड़ ली है। प्रशासन की सक्रिय कार्यशैली, सतत मॉनिटरिंग, मिलर्स एवं परिवहन एजेंसियों के साथ सुदृढ़ समन्वय तथा चरणबद्ध रणनीति के परिणामस्वरूप 25 उपार्जन केंद्रों में खरीदे गए धान का सुव्यवस्थित परिवहन लगातार जारी है। अब तक जिले में कुल 8 लाख 79 हजार 848.6 क्विंटल धान की खरीदी की जा चुकी है, जिनमें से 4 लाख 82 हजार 860 क्विंटल धान का सफलतापूर्वक उठाव कर लिया गया है। यह उपलब्धि न केवल प्रशासनिक दक्षता को दर्शाती है, बल्कि यह भी प्रमाणित करती है कि जिले में धान प्रबंधन की व्यवस्था पूरी तरह संगठित और परिणामोन्मुखी है।
धान उठाव में आई तेजी से उपार्जन केंद्रों एवं सोसायटी परिसरों में भंडारण का दबाव लगातार कम हो रहा है। इससे केंद्रों पर व्यवस्था सुचारु बनी हुई है और नए आगमन के लिए पर्याप्त स्थान उपलब्ध हो पा रहा है। प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा नियमित निरीक्षण एवं समीक्षा बैठकें लेकर प्रगति की निगरानी की जा रही है, जिससे किसी भी प्रकार की अव्यवस्था या विलंब की स्थिति उत्पन्न न हो। परिवहन एजेंसियों को समयबद्ध लक्ष्य निर्धारित कर दिए गए हैं और मिलर्स के साथ समन्वय स्थापित कर चरणवार धान उठाव सुनिश्चित किया जा रहा है। इसका सकारात्मक प्रभाव यह है कि किसानों को भुगतान प्रक्रिया में तेजी मिली है और उन्हें अपनी उपज का लाभ समय पर प्राप्त हो रहा है।
जिले के प्रमुख उपार्जन केंद्रों से उल्लेखनीय मात्रा में धान का उठाव दर्ज किया गया है। केल्हारी केंद्र से 39,380 क्विंटल, कौड़ीमार से 38,260 क्विंटल, बरबसपुर से 31,290 क्विंटल, चैनपुर से 30,860 क्विंटल, डोडकी से 30,530 क्विंटल, बरदर से 30,210 क्विंटल, कोड़ा से 27,810 क्विंटल, नागपुर से 24,040 क्विंटल, घुटरा से 23,620 क्विंटल, कठौतिया से 23,600 क्विंटल, कुवांरपुर से 23,160 क्विंटल, बंजी से 23,120 क्विंटल तथा खड़गवां से 20,930 क्विंटल धान का सफल उठाव किया जा चुका है। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि जिले के अधिकांश बड़े केंद्रों में कार्य तेज गति से आगे बढ़ रहा है और लक्ष्य की दिशा में ठोस प्रगति हो रही है।
प्रशासन द्वारा शेष 3 लाख 96 हजार 988.6 क्विंटल धान के उठाव को भी निर्धारित समयसीमा में पूर्ण करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके लिए परिवहन व्यवस्था को और सुदृढ़ किया जा रहा है तथा दैनिक प्रगति की समीक्षा की जा रही है। अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि किसी भी स्तर पर लापरवाही न बरती जाए और किसानों के हितों को सर्वाेच्च प्राथमिकता दी जाए। पारदर्शी प्रक्रिया, नियमित निगरानी और त्वरित कार्रवाई की नीति के कारण जिले में धान खरीदी एवं उठाव की व्यवस्था एक मॉडल के रूप में उभर रही है।
समर्थन मूल्य पर धान खरीदी और उसके बाद तेज गति से हो रहा उठाव किसानों के लिए राहतकारी सिद्ध हो रहा है। समय पर भुगतान, सुगम प्रक्रिया और प्रशासनिक तत्परता ने किसानों का भरोसा मजबूत किया है। जिले में चल रही यह सुव्यवस्थित और समन्वित व्यवस्था न केवल आर्थिक गतिविधियों को गति दे रही है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी सशक्त बना रही है।
