बस्तर। जिले के करपावंड रेंज के मोखनगांव के जंगलों में लगी आग के बीच दो मासूम बच्चों ने साहस और जिम्मेदारी की अनोखी मिसाल पेश की है। धनपुर गांव के रहने वाले 8 वर्षीय मुना और 10 वर्षीय तिलक ने जंगल में आग देखी तो घबराने की बजाय तुरंत उसे बुझाने में जुट गए। दोनों बच्चे वन विभाग के कर्मचारियों के साथ मिलकर आग बुझाने में मदद करते रहे।

जिस उम्र में बच्चे खेलकूद में व्यस्त रहते हैं, उस उम्र में इन बच्चों ने जंगल और वन्य जीवन की रक्षा के लिए आगे आकर सभी को हैरान कर दिया। वन विभाग के अधिकारियों ने दोनों बच्चों के साहस की सराहना करते हुए उन्हें सम्मानित करने की घोषणा की है। अधिकारियों का कहना है कि जंगल केवल पेड़ों का समूह नहीं बल्कि पर्यावरण और जीवन का आधार हैं, जिनकी रक्षा हम सभी की जिम्मेदारी है।

बस्तर जिले में मलेरिया को लेकर विशेषज्ञों ने नई चेतावनी जारी की है। अब बुखार के साथ दस्त होना भी मलेरिया का संकेत हो सकता है। मेडिकल कॉलेज डिमरापाल में आयोजित मलेरिया अपडेट संगोष्ठी में देशभर के विशेषज्ञों ने बताया कि मलेरिया के परजीवी समय के साथ अपनी प्रकृति बदल रहे हैं।

विशेषज्ञों के मुताबिक असिम्प्टोमेटिक मलेरिया यानी बिना स्पष्ट लक्षण वाला मलेरिया सबसे ज्यादा खतरनाक साबित हो रहा है। ऐसे मामलों में मरीज को बीमारी का पता ही नहीं चलता और समय पर इलाज नहीं मिलने से स्थिति गंभीर हो सकती है। हालांकि मलेरिया नियंत्रण अभियान के चलते बस्तर जिले में बड़ी सफलता भी मिली है। वर्ष 2017 में जहां हजारों मरीज सामने आए थे, वहीं अब मरीजों की संख्या काफी कम हो गई है। सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि पिछले वर्ष जिले में मलेरिया से एक भी मौत दर्ज नहीं हुई।

By kgnews

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *