राजनांदगांव , मठपारा मुक्तिधाम में चिता जलने के तीन दिन बाद वहां अस्थियां नहीं मिलने पर मृतक के परिजनों ने जमकर हंगामा किया। मुक्तिधाम प्रबंधन पर सवाल खड़ा करते नाराजगी जताई। मामले की जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है। उसी अस्थि को कोई दूसरा परिवार अपने मृतक परिजन की अस्थि समझ कर ले गया और उसका शिवनाथ नदी में विसर्जन कर दिया गया। परिवार ने अपनी गलती स्वीकार करते पहले परिवार से माफी मांगी। पहले परिवार ने मुक्तिधाम की कार्य प्रणाली पर सवाल खड़ा किया है।
मां शीतला मंदिर रोड चिखली वार्ड 5 के रहने वाले 39 वर्षीय पंकज चौहान की मृत्यु रविवार सुबह 10 बजे अस्पताल में इलाज के दौरान हुई थी। करीब 12 बजे शव लेकर घर पहुंचे। शाम 5 बजे लखोली स्थित मुक्तिधाम में 2 नंबर शव दाह में अंतिम संस्कार किया था। मंगलवार को परिवार अस्थि लेने पहुंचा तो पता चला 3 नंबर में चिता जली थी वह परिवार 2 नंबर पर जली पंकज की अस्थि को शिवनाथ नदी में विसर्जन कर दिया जबकि 3 नंबर शव दाह में जली अस्थियां उसी जगह पर थी।
परिजन ने लापरवाही का आरोप प्रबंधन पर लगाया मृतक के भाई राहुल सिंह चौहान ने मुक्तिधाम प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा प्रबंधक से शिकायत करने पर हमारी जवाबदारी नहीं परिजनों की है यह बात कह कर पल्ला झाड़ लिया गया। उन्होंने कहा कलेक्टर से शिकायत करेंगे। शव दाह नंबर 2 में जिस महिला का अंतिम संस्कार किया उसके पति ने 2 नंबर शव दाह की अस्थियों को लेकर जाकर शिवनाथ नदी में विसर्जन करने की बात कहते गलती स्वीकारी और माफी मांगी। पंकज के परिजन अस्थियां को लेकर इलाहाबाद जाने की तैयारी में थे। रिजर्वेशन किया गया था।
हमारे पास पूरा रिकार्ड, परिजनों से भूल हुई: पारख गौशाला पिंजरा पोल एवं मुक्तिधाम के अध्यक्ष खूबचंद पारख ने कहा मुक्तिधाम में किसका शव कब और किस नंबर के शवदाह में जला इसका रिकार्ड है। अदला-बदली परिजनों की गलती से भूलवश हुई ऐसा जानबूझ कर नहीं किया गया। अस्थि ले जाने वाले परिवार ने पहले परिवार से माफी भी मांगी है। मुक्तिधाम में 1 महिला चौकीदार समर्पण भावना से कार्य करती है। पहट में ताला खोल दिया जाता है। जिससे लोगों को सुविधा हो पहट में लोग अस्थियां ले जाने पहुंचते है। परिजनों से भूलवश इस तरह की गलती हुई है। इसमें हमारे प्रबंधन की गलती नहीं है।
