राजनांदगांव , कुपोषण के खिलाफ जिले में चलाई जा रही “पोट्ठ लईका पहल” अब असर दिखाने लगी है। महज 9 महीनों में हजारों बच्चों को कुपोषण की श्रेणी से बाहर निकालने में सफलता मिली है।

इस बदलाव की असली ताकत बनीं आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, जिन्हें मंगलवार को कलेक्टर जितेन्द्र यादव ने सम्मानित किया। जिला पंचायत सभाकक्ष में आयोजित कार्यक्रम में कलेक्टर ने कहा कि कुपोषण से लड़ाई केवल योजनाओं से नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर समर्पित काम से जीती जाती है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने घर-घर पहुंचकर न सिर्फ बच्चों की निगरानी की, बल्कि माताओं को भी पोषण और देखभाल के प्रति जागरूक किया।

इस दौरान शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों की 7 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को उत्कृष्ट कार्य के लिए सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में जिला पंचायत सीईओ सुरूचि सिंह, सीएमएचओ डॉ. एनआर नवरतन और महिला एवं बाल विकास की जिला कार्यक्रम अधिकारी गुरूप्रीत कौर भी मौजूद रहीं।

करीब 3 हजार से ज्यादा बच्चे कुपोषण से बाहर आए: पहल के तहत सिर्फ बच्चों को पोषण आहार देने तक सीमित न रहकर माताओं को स्तनपान, पूरक आहार और स्वच्छता के प्रति जागरूक किया गया। यही कारण है कि कई मामलों में बच्चे तेजी से सामान्य श्रेणी में लौटे। सम्मानित कार्यकर्ताओं में भानमती यादव, ममता निर्मलकर, रोहिणी साहू, जयंती वैष्णव, पुष्पा वर्मा, संजना कंवर और इंद्रोतीन कुंजाम शामिल हैं, जिन्होंने अपने क्षेत्र में कुपोषण के खिलाफ मॉडल काम किया।

इस उपलब्धि में​ जमीनी ट्रैकिंग बना गेम चेंजर इस पहल की खासियत केवल अभियान नहीं, बल्कि बच्चों की नियमित मॉनिटरिंग और डेटा आधारित काम रहा। हर कुपोषित बच्चे की पहचान, उसकी प्रगति की ट्रैकिंग और जरूरत के मुताबिक पोषण हस्तक्षेप ने परिणाम को तेज किया। जून 2025 में जिले में कुल 9751 कुपोषित बच्चे चिन्हित थे। इनमें अति गंभीर, गंभीर और मध्यम श्रेणियों के बच्चों की संख्या काफी अधिक थी। लेकिन मार्च 2026 तक इन आंकड़ों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई।

By kgnews

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