राजनांदगांव , कक्षा 12वीं बोर्ड हिन्दी की कॉपियां जांचने के लिए बोर्ड ने दसवीं बोर्ड कक्षा के बच्चों को पढ़ाने वाले शिक्षकों की ड्यूटी लगा दी है। दसवीं के शिक्षक सालों से दसवीं कक्षा के बच्चों को हिन्दी विषय पढ़ा-लिखा रहे हैं। उन्हें 12वीं कक्षा में हिन्दी विषय का सिलेबस, परीक्षा में पूछे गए प्रश्न और व्याकरण की कोई जानकारी नहीं है। ऐसे में सीधे 12वीं बोर्ड परीक्षा की हिन्दी विषय की कॉपियों का मूल्यांकन उनके लिए चुनौती साबित हो रहा। बच्चों की बौद्धिक क्षमता सही उत्तरों का आंकलन और सही मूल्यांकन कर अंक देने में समस्या हो रही है।

कक्षा 12वीं बोर्ड में 14 मार्च को हुई हिन्दी विषय की परीक्षा का पर्चा लीक होने की शिकायतों के बाद प्रदेश और जिले में दोबारा परीक्षा लेनी पड़ी। माशिमं द्वारा 10 अप्रैल को जिले के 88 केन्द्रों में सुबह 9 से 12:15 बजे के बीच 12वीं में हिन्दी विषय की परीक्षा ली गई। इस बार गोपनीय सामग्री के वितरण, परीक्षा का सफल संचालन और नकल रोकने तगड़ा इंतजाम किया गया था। परीक्षा में 74 अनुपस्थित थे। वहीं नकल प्रकरण नहीं मिला। यहां की कॉपियों का मूल्यांकन अन्य जिलों में किया जाएगा। अन्य जिलों की कॉपियां मूल्यांकन के लिए यहां पहुंच चुकी है। लेकिन जिले के 157 में हायर के साथ हाई स्कूल एवं प्राइवेट स्कूल के शिक्षकों की इस काम में ड्यूटी लगा दी गई है।

मूल्यांकन की गुणवत्ता और बच्चों की मेहनत का सही आंकलन कर उनके लिखे गए उत्तरों की सटीक जांच कर अंक देने पर सवाल खड़े होंगे।दसवीं के बच्चों को पढ़ाने वाले शिक्षक 12वीं के सिलेबस से कोसों दूर है। हिन्दी जैसे विषय में व्याकरण का अलग महत्व है। कक्षा 12वीं में नियमित रूप से हिन्दी और व्याकरण पढ़ाने वाले शिक्षकों को इसका सही ज्ञान होता है। दसवीं के शिक्षक सिलेबस और पाठ्यक्रम के मामले में अपने नॉलेज व अंदाजे से 12वीं बोर्ड के हिन्दी विषय की कॉपियों का मूल्यांकन कर बच्चों को अंक देने के लिए मजबूर होंगे।

By kgnews

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