बालोद। छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में आवारा कुत्ते के हमले ने एक बार फिर लोगों को दहशत में डाल दिया है। डौंडीलोहारा थाना क्षेत्र के ग्राम चिल्हाटीखुर्द में 4 साल के मासूम बच्चे पर कुत्ते ने अचानक हमला कर उसे बुरी तरह नोच डाला। इस हमले में बच्चे के शरीर पर 17 से अधिक स्थानों पर गहरे जख्म आए हैं और उसकी हालत गंभीर बनी हुई है। जानकारी के अनुसार, ललित पाथरे का 4 वर्षीय नाती नादित्य पाथरे अपने घर के पास खेल रहा था। इसी दौरान एक आवारा और आक्रामक कुत्ता अचानक वहां पहुंचा और बच्चे पर झपट पड़ा। कुत्ते ने बच्चे को दौड़ा-दौड़ाकर काटा और कुछ ही पलों में उसे गंभीर रूप से घायल कर दिया। बच्चे की चीख-पुकार सुनकर आसपास के ग्रामीण मौके पर पहुंचे, लेकिन तब तक कुत्ता उसे बुरी तरह घायल कर चुका था।
ग्रामीणों ने काफी मशक्कत के बाद बच्चे को कुत्ते के चंगुल से छुड़ाया। इस दौरान बच्चे के दादा ललित पाथरे ने भी साहस दिखाते हुए उसे बचाने की कोशिश की, लेकिन कुत्ते ने उन पर भी हमला कर दिया, हालांकि वे बाल-बाल बच गए। घटना के बाद गांव में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। परिजनों ने तत्काल बच्चे को डौंडीलोहारा अस्पताल पहुंचाया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे राजनांदगांव मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। बाद में हालत में सुधार नहीं होने पर बच्चे को रायपुर के एक निजी अस्पताल में शिफ्ट किया गया, जहां उसका इलाज जारी है।
डॉक्टरों के अनुसार, बच्चे की स्थिति बेहद गंभीर है। उसके सिर, चेहरा, नाक, कान, होंठ, हाथ और पैरों सहित शरीर के कुल 17 स्थानों पर गहरे घाव हैं। चिकित्सकों ने बताया कि बच्चे की हालत स्थिर होने के बाद लगभग 24 घंटे के भीतर आवश्यक सर्जरी की जाएगी। ग्रामीणों ने बताया कि जिस कुत्ते ने बच्चे पर हमला किया, उसने गांव में अन्य लोगों और पशुओं पर भी हमला किया था। उसी दिन एक 30 वर्षीय व्यक्ति हुमन चंदेल और एक अन्य राहगीर भी कुत्ते के हमले में घायल हुए। इसके अलावा गांव के चार मवेशियों को भी कुत्ते ने काट लिया।
घटना के बाद गांव में आक्रोश फैल गया और ग्रामीणों ने मिलकर उस आवारा कुत्ते को पकड़ लिया। लोगों का कहना है कि क्षेत्र में आवारा कुत्तों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिससे छोटे बच्चों और बुजुर्गों के लिए खतरा बढ़ गया है। पीड़ित बच्चे की पारिवारिक स्थिति भी बेहद दुखद है। जानकारी के अनुसार, नादित्य के पिता दीपक पाथरे का पिछले वर्ष निधन हो चुका है। बच्चे की परवरिश उसके दादा ललित पाथरे कर रहे थे। इस दर्दनाक घटना के बाद परिवार गहरे सदमे में है और गांव में भी शोक का माहौल है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि आवारा कुत्तों पर नियंत्रण के लिए तत्काल ठोस कदम उठाए जाएं, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते आवारा कुत्तों की समस्या पर ध्यान नहीं दिया गया तो ऐसी घटनाएं और बढ़ सकती हैं, जिससे बच्चों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।

