हरी खाद से लहलहाएंगे खेत: धान उत्पादन बढ़ाने कृषि विभाग का विशेष अभियान तेज
"रासायनिक उर्वरकों का विकल्प बन रही हरी खाद, 176 हेक्टेयर में विस्तार का लक्ष्य तय"
मनेन्द्रगढ़/एमसीबी
जिले में मृदा की सेहत सुधारने और धान उत्पादन बढ़ाने के उद्देश्य से कृषि विभाग ने खरीफ सीजन में हरी खाद और जैव उर्वरकों को बढ़ावा देने के लिए विशेष अभियान शुरू किया है। विभाग का मानना है कि रासायनिक उर्वरकों के लगातार उपयोग से मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है, जिससे उत्पादन पर भी असर पड़ रहा है।
अभियान के तहत किसानों को रोपा पद्धति से धान की खेती से पहले खेतों में ढैंचा, सन जैसी शीघ्र बढ़ने वाली दलहनी फसलों की बुवाई करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इन फसलों को एक निश्चित अवस्था में मिट्टी में पलटने से मिट्टी में जैविक तत्वों की मात्रा बढ़ती है और प्राकृतिक रूप से पोषक तत्वों की पूर्ति होती है।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, ढैंचा एक अत्यंत प्रभावी हरी खाद है, जिससे प्रति हेक्टेयर 30 से 40 किलोग्राम तक नाइट्रोजन प्राप्त हो सकती है। इसकी बुवाई 35 से 45 दिन पहले की जाती है और 2 से 3 फीट ऊंचाई होने पर इसे मिट्टी में मिला दिया जाता है, जो कुछ ही दिनों में सड़-गलकर फसल के लिए पोषक तत्व उपलब्ध कराती है।
जिले में इस अभियान के तहत कुल 176 हेक्टेयर क्षेत्र में हरी खाद के उपयोग का लक्ष्य रखा गया है। इसमें मनेन्द्रगढ़ के लिए 62 हेक्टेयर, खड़गवां के लिए 52 हेक्टेयर और भरतपुर के लिए 62 हेक्टेयर निर्धारित किए गए हैं।
कृषि विभाग किसानों को हरी खाद के बीज 50 प्रतिशत अनुदान पर उपलब्ध करा रहा है। विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे इस पहल का लाभ उठाकर मृदा स्वास्थ्य सुधारें और बेहतर उत्पादन सुनिश्चित करें।
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