भोजशाला गर्भगृह में गुपचुप रखी गई मां वाग्देवी की प्रतिमा, ASI ने तुरंत हटाया; सुरक्षा बढ़ाई गई

  धार 
धार जिले में स्थित भोजशाला परिसर में  मां वाग्देवी की अष्टधातु की प्रतिमा विराजित किए जाने की घटना के बाद प्रशासन भी हरकत में आया है। परिसर के अंदर सुरक्षा चौकसी बढ़ा दी गई है। मामला संज्ञान में आने के तुरंत बाद प्रतिमा को प्रशासन ने हटा दिया है। अभी ये स्पष्ट नहीं हो पाया है कि, परिसर के अंदर इस प्रतिमा को कौन लेकर आया था।

गर्भगृह में पूर्व की भांति मां वाग्देवी का प्रतीकात्मक स्वरूप स्थापित था, जिसकी पूजा – अर्चना की गई। वहीं, घटनाक्रम को लेकर कोई भी जवाबदार अधिकारी बयान देने की स्थिति में नहीं है। एएसआई अधिकारी प्रशांत पाटनकर ने अधिकृत बयान देने से साफ इंकार कर दिया। उल्लेखनीय है कि, शनिवार दोपहर को अज्ञात व्यक्तियों द्वारा भोजशाला परिसर में प्रवेश करने के साथ गर्भगृह में मां वाग्देवी की अष्टधातु की प्रतिमा को रख दिया था, जिसकी जानकारी लगने के बाद कई लोग दर्शन के लिए पहुंचे थे।

लंदन संग्रहालय से मूर्ति लाने की मांग
मां वाग्देवी की प्राचीन मूर्ति लंदन संग्रहालय में रखी है, जिसे बिटिश शासन में ले जाया गया था। हाल ही में भोजशाला को हाईकोर्ट द्वारा मंदिर घोषित किए जाने के बाद हिंदू समाज द्वारा मूर्ति को लंदन से वापस लाने की मांग की जा रही है। मां वाग्देवी की एक प्रतिमा ग्वालियर के प्रभात स्टूडियो में रखी हुई है। इस प्रतिमा का निर्माण वर्ष 2011 में संघ के पूर्व प्रचारक नवल किशोर शर्मा द्वारा करवाया गया था। किन्हीं कारणों से ये प्रतिमा धार नहीं आ पाई है।

जानकारी मिलते ही एएसआई के उड़े होश, हटवाई प्रतिमा
 शाम करीब साढ़े 6 बजे जैसे ही यह जानकारी भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के अधिकारियों तक पहुंची तो उनके होश उड़ गए. परिसर में हड़कंप मचने के बाद एएसआई की टीम ने तत्काल मौके पर पहुंचकर प्रतिमा को हटाया गया. हालांकि यह अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाया है कि प्रतिमा को परिसर में कौन लेकर आया, किसने स्थापित किया और सुरक्षा तंत्र को इसकी जानकारी क्यों नहीं मिल सकी। 

सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल, गर्भगृह तक कैसे पहुंची प्रतिमा?
हाल ही में हाईकोर्ट द्वारा भोजशाला को सरस्वती मंदिर घोषित किए जाने और मुख्यमंत्री द्वारा यहां सरस्वती लोक और राजा भोज शोध संस्थान की घोषणा के बाद भोजशाला परिसर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में है. ऐसे माहौल में प्रतिमा की अचानक स्थापना और फिर उसे हटाए जाने की घटना से सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं. हाईकोर्ट के आदेश के बाद यहां की पूरी जिम्मेदारी एएसआई को दी गई है। 

इधर, मुस्लिम समाज ने घटनाक्रम पर जताया ऐतराज, सौंपा ज्ञापन
कमाल मौला मस्जिद इंतजामिया कमेटी ने भोजशाला – कमाल मौला मस्जिद परिसर में अनधिकृत प्रवेश और प्रतिमा स्थापित करने की घटना पर गहरा रोष जताया है। कमेटी ने रविवार को थाना कोतवाली में शिकायत दर्ज कराई है। कमेटी के नायब सदर इरशाद मंसूरी ने पुलिस प्रशासन को ज्ञापन सौंपते हुए इसे कानून का उल्लंघन और सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने का प्रयास करार दिया। मंसूरी ने स्पष्ट किया कि यह परिसर एक संरक्षित स्मारक है और यहां धार्मिक स्वरूप में हस्तक्षेप करना दंडनीय अपराध है। कमेटी ने मांग की है कि, संबंधित अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। साथ ही, भविष्य में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की भी मांग की गई है।

शिकायत की वैधता नहीं
वहीं, मामले को लेकर धार पुलिस अधीक्षक सचिन शर्मा ने कहा है कि, 'प्रतिमा रखने या ना रखने की कोई गाइडलाइन नहीं है। एक पक्ष अगर इसकी शिकायत कर भी रहा है तो उसकी वैधता नहीं है।'

कई लेयर की सुरक्षा व्यवस्था के साथ सीसीटीवी से निगरानी
वैसे तो भोजशाला परिसर में हमेशा से ही सुरक्षा व्यवस्था तैनात रही है लेकिन हाईकोर्ट के फैसले के बाद संवेदनशीलता को देखते हुए यहां कई लेयर में सुरक्षा व्यवस्था तैनात की गई है. स्थानीय पुलिस-प्रशासन के साथ-साथ भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के पास सुरक्षा का जिम्मा है. परिसर के बाहरी हिस्से में पुलिस चौकी बनाई है और यहां 24 घंटे जिला पुलिस के साथ विशेष सुरक्षा बल तैनात रहते हैं. इसके अलावा यह पूरा परिसर सीसीटीवी से लैस है. परिसर में अंदर जाने के लिए मेटल डिटेक्टर से होकर गुजरना पड़ता है। 

चूंकि यह परिसर एएसआई के अधीन है इस कारण इसके अंदर एएसआई के सुरक्षा गार्ड भी 24 घंटे निगरानी करते हैं. इसके बावजूद मां वाग्देवी की अष्टधातु जैसी भारी धातु की प्रतिमा का भोजशाला परिसर में पहुंचना और गर्भगृह में स्थापित हो जाने पर सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं. सवाल यह भी है कि प्रतिमा अंदर पहुंचने के बाद स्थापना की पूरी प्रक्रिया कैसे संपन्न हो गई और किसी अधिकारी या सुरक्षाकर्मी को इसकी जानकारी क्यों नहीं मिली। 

घटना से पहले ही पहुंचे थे एएसआई अधीक्षक
जानकारी के अनुसार शनिवार की दोपहर एएसआई के अधीक्षक डॉ शिवाकांत बाजपेई भोजशाला पहुंचे थे. उन्होंने परिसर का निरीक्षण कर सुरक्षा व्यवस्था का भी जायजा लिया था. उन्होंने वहां मौजूद अधिकारियों से हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुरूप लागू सुरक्षा व्यवस्था की भी समीक्षा की थी. उनके निरीक्षण के कुछ घंटे बाद ही प्रतिमा स्थापना का मामला सामने आने से सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं. हालांकि जांच एजेंसियां सीसीटीवी फुटेज खंगालने में जुटी हैं। 

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