45 की उम्र में IAS अवनीश शरण की फिटनेस जर्नी बनी मिसाल, खुद शेयर किया ट्रांसफॉर्मेशन

रायपुर.

छत्तीसगढ़ कैडर के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अवनीश शरण इन दिनों किसी प्रशासनिक फैसले नहीं, बल्कि अपनी प्रेरणादायक फिटनेस यात्रा को लेकर चर्चा में हैं। सोशल मीडिया पर साझा की गई उनकी पोस्ट हजारों लोगों के लिए प्रेरणा बन रही है।

इसमें उन्होंने बताया है कि किस अनुशासित प्रयासों ने न सिर्फ उनके शरीर का कायाकल्प किया, बल्कि उनकी स्वास्थ्य रिपोर्ट भी पूरी तरह बदल दी। आईएएस अवनीश शरण ने सोशल मीडिया पोस्ट में बताया है कि कोविड के बाद वर्ष 2020 में उन्होंने फिटनेस की शुरुआत की थी। हालांकि नौकरी की व्यस्तता, पारिवारिक जिम्मेदारियों और वर्ष 2024 में हुई सर्जरी के कारण उनकी दिनचर्या बार-बार बाधित होती रही। लेकिन जून 2025 में उन्होंने एक बार फिर नई शुरुआत की। इस बार उनका लक्ष्य केवल वजन कम करना नहीं, बल्कि खुद को पहले से अधिक स्वस्थ बनाना था।

उन्होंने नियमित स्ट्रेंथ ट्रेनिंग, संतुलित एवं उच्च-प्रोटीन आहार, कैलोरी ट्रैकिंग, रोजाना पैदल चलना, पर्याप्त नींद और रिकवरी को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाया। उन्होंने लिखा कि 1 जनवरी 2026 को उन्होंने अपनी बेटी वेदिका के 27 जून के जन्मदिन तक अपनी सर्वश्रेष्ठ फिटनेस हासिल करने का लक्ष्य तय किया था। इस पूरी यात्रा में उनकी पत्नी रुद्राणी ने हर कदम पर उनका साथ दिया। अवनीश शरण के मुताबिक इस अनुशासित जीवनशैली का असर केवल उनके शरीर पर ही नहीं, बल्कि उनकी ब्लड रिपोर्ट में भी साफ दिखाई दिया।

सितंबर 2025 से मई 2026 के बीच उनका कुल कोलेस्ट्रॉल 278 से घटकर 158, एलडीएल 205.2 से घटकर 83, एचडीएल 51 से बढ़कर 62.8 और ट्राइग्लिसराइड्स 109 से घटकर 61.9 पर पहुंच गया। उन्होंने बताया कि उनका बॉडी फैट 30 प्रतिशत से अधिक से घटकर सिंगल डिजिट में आ गया, जिससे हृदय रोगों का जोखिम भी काफी कम हुआ। अपना अनुभव साझा करते हुए उन्होंने लिखा कि किसी भी बदलाव के लिए प्रेरणा से ज्यादा जरूरी अनुशासन और निरंतरता है। उनका कहना है कि स्वास्थ्य का आकलन केवल वजन से नहीं, बल्कि ब्लड रिपोर्ट, शरीर की क्षमता और ऊर्जा के स्तर से भी होना चाहिए। उन्होंने लोगों से नियमित स्वास्थ्य जांच, स्ट्रेंथ ट्रेनिंग, पर्याप्त प्रोटीन, अच्छी नींद और संतुलित जीवनशैली अपनाने की अपील की।

पोस्ट के अंत में अवनीश शरण ने लिखा, “मेरी सबसे बड़ी उपलब्धि वजन कम करना नहीं है, बल्कि 45 वर्ष की उम्र में 39 वर्ष की उम्र से अधिक स्वस्थ होना है। इस यात्रा ने मुझे सिखाया कि अनुशासन प्रेरणा से अधिक शक्तिशाली है, निरंतरता पूर्णता से अधिक मूल्यवान है और स्वास्थ्य से बड़ा कोई निवेश नहीं।”

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