पूरे देश में शक्ति और माता की आराधना के पर्व नवरात्रि की धूम मची हुई है। श्रद्धालु माता के मंदिरों पर पहुंचकर माता का दर्शन और पूजन कर रहे हैं। वहीं शाम होते ही ढोल की थाप पर गरबा के माध्यम से भी माता की आराधना की जा रही है। धार्मिक नगरी उज्जैन में वैसे तो कई अतिप्राचीन माता के मंदिर है, लेकिन आज हम आपको ऐसे संग्रहालय की जानकारी देने जा रहे हैं, जहां विराजित माता प्रतिमाएं अतिप्राचीन तो है ही, लेकिन यह प्रतिमाएं विदेशों तक पहुंचकर भारत का प्रतिनिधित्व भी कर चुकी है। उज्जैन में महाकाल लोक के समीप स्थित त्रिवेणी संग्रहालय मूलरूप से 2016 सिहस्थ में मध्यप्रदेश शासन संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग के माध्यम से स्थापित किया गया था। खास बात यह है कि इस संग्रहालय मे ऐतिहासिक और पौराणिक मूर्तियों का अनूठा संग्रह है, जिसका सनातन से गहरा संबंध है। देश विदेश के कोने-कोने से पर्यटक यहां आते हैं।पौराणिक और ऐतिहासिक प्रतिमाओं का है संग्रहत्रिवेणी संग्रहालय के योगेश पाल बताते हैं कि इस संग्रहालय में पौराणिक और ऐतिहासिक प्रतिमाओं का संग्रह है, जिसका सनातन से गहरा संबंध है। देश-विदेश के पर्यटक इस संग्रहालय को देखने प्रतिदिन उज्जैन आते हैं। योगेश ने बताया कि संग्रहालय की स्थापना के दौरान यहां प्रदेश के 10 संग्रहालयों से प्राचीन और सर्वश्रेष्ठ प्रतिमाओं को लाकर रखा गया है। इसके साथ ही पुरातत्व दीर्घा में प्रदर्शित लगभग 1800 वर्ष प्राचीन देवी सरस्वती की प्रतिमा अपने आप में अनुपम है।प्रतिमा में देवी सरस्वती को वीणा का वादन करते हुए दिखाया गया है। इसी तरह संग्रहालय की दीर्घा में आठवीं शताब्दी ईस्वीं की विश्व प्रसिद्ध महिषासुरमर्दिनी की प्रतिमा भी है। यहां पर सप्त मातृकाएं भी है जो विभिन्न देवों की शक्ति है, जिसमें ब्राह्मणी, वैष्णवी, माहेश्वरी, कौमारी, आदि छठी सातवीं शताब्दी की प्रतिमाएं है। इस संग्रहालय में शैव, शाक्त एवं वैष्णव संप्रदाय की अति प्राचीन पाषाण निर्मित प्रतिमाएं प्रदर्शित है। महिषासुर मर्दिनी की प्रतिमा वर्ष 2013 में बेल्जियम के ब्रुसेल्स में आयोजित प्रदर्शनी में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए भी प्रदर्शित हो चुकी है। 

By kgnews

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