भिलाई नगर निगम के अलग-अलग जोन में हरियाली फैलाने के लिए 20-20 लाख रुपए के पौधे सड़कों के किनारे लगाए गए थे। इस काम की मॉनीटरिंग निगम के जिम्मेदारों ने नहीं की। अब अधिकतर जगह ये पौधे नहीं दिखने की शिकायत मिलने पर अधिकारी जागे हैं। कितने पौधे लगे हैं, इसकी गणना कराने में निगम जुट गई है। जोन-2 वैशाली नगर में इस तरह के पौधे मुख्य मार्ग के किनारे लगाए जाने का दावा किया जा रहा है। कई जगह से पौधे और पाइप दोनों गायब हो चुके हैं।133 पौधे देखरेख के अभाव में सूख गएनिगम का दावा है कि एजेंसी ने 1080 पौधे रोपं हैं। इनमें से 133 अब सूख चुके हैं। इसके अलावा कई जगह से पाइप भी गायब हो चुके हैं। नए पौधे और पाइप लगाने का काम एजेंसी को फिर से करना है। इसके लिए उसे निर्देश दिया गया है। बताया जा रहा है कि अब तक एजेंसी ने 40 पौधे रिप्लेस कर दिए हैं।दो दर्जन पौधे लगाए गौरव पथ मेंनिगम ने करीब दो दर्जन पौधे गौरव पथ के किनारे लगाए हैं। पौधों को लगाते वक्त न इसकी दूरी का ध्यान रखा गया है और न ही पौधों की हाइट का। यहां कुछ ही पौधे बचे हैं, बाकी गायब हो चुके हैं। पौधरोपण के नाम पर इस रोड में कुछ पौधे ही लगाए गए हैं। गौरव पथ से हाउसिंग बोर्ड जाने वाले रास्ते में डिवाइडर में भी कुछ पौधे लगा दिए गए हैं। यह पौधे झाड़ियों के बीच ऐसे लगा दिए हैं कि वह नजर भी नहीं आते। पौधरोपण करने के दौरान निगम के अफसर या सुपरवाइजर ने मॉनिटरिंग नहीं की। इस वजह से एजेंसी ने यहां खानापूर्ति कर ली।गणना करने में हो रही दिक्कतभिलाई निगम के आयुक्त ने जोन आयुक्तों को एजेंसी ने कितने पौधे रोपे और उसकी स्थिति को लेकर ऑडिट करने निर्देश दिया है। इसके लिए निगम की टीम को अब पौधे तलाशने पड़ रहा है।2100 पौधे लगाने का था टारगेटनिगम ने एजेंसी को करीब 20 लाख रुपए में छह फीट की ऊंचाई वाले 2100 पौधे लगाने का निर्देश दिया था। इसके उलट अब तक 1080 लगाए जाने का दावा किया जा रहा है। हालांकि मौके पर वह भी नजर नहीं आ रहा है।रिप्लेस कर रहे पौधे1080 पौधे एजेंसी ने लगाया है। इसकी गणना निगम की टीम कर रही है। अब तक 133 पौधों के मर जाने की जानकारी है। उनके स्थान पर नए पौधे एजेंसी रिप्लेस करेगी।येशा लहरे, आयुक्त, जोन-2, नगर निगम, भिलाईपौधों की सुरक्षा नहींनिगम की एजेंसी ने पौधों की सुरक्षा के लिए, उसमें पाइप लगा दिया था। पाइप सभी जगह नहीं लगाए थे। इस वजह से पौधे कई जगह से गायब हो चुके हैं। टूटे पाइप को बदला तक नहीं गया है। पौधरोपण से अधिक ध्यान उसकी सुरक्षा पर देना होता है।
