राजनांदगांव. चुनाव परिणाम आने के बाद राजनीतिक दलों की सक्रियता और बूथ स्तर पर हुए कार्यों की सच्चाई सामने आ चुकी है। इन परिणामों ने नेताओं की ओर से किए जा रहे दावों की पोल खोल दी है। दोनों ही प्रमुख दल भाजपा और कांग्रेस की ओर से आगामी दिनों में चुनाव परिणाम को लेकर समीक्षा की जाती है तो कई बड़े राज खुलकर सामने आएंगे जो कि चौंकाने वाले होंगे। खबर है कि दोनों ही प्रमुख दलों की ओर से समीक्षा बैठक बुलाई जाएगी। इस दौरान चुनाव में प्रभार संभालने वाले नेताओं से हार-जीत को लेकर सवाल, जवाब किए जा सकते हैं। इधर कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने तो स्पष्ट कर दिया है कि आगामी दिनों में पार्टी हार की समीक्षा करेगी। माना जा रहा है कि जिला स्तर पर भी बैठक लेकर चुनावी समीक्षा जरूर होगी, क्योंकि दोनों ही दलों में लोकसभा चुनाव की तैयारी जो करनी है। राजनांदगांव विधानसभा में देखें तो भाजपा की जीत के बाद उन नेताओं की परेशानी दूर हो गई है जो कि चुनाव के दौरान निष्क्रिय थे और दबी जुबान भाजपा प्रत्याशी डॉ. रमन सिंह के खिलाफ बातें कर रहे थे।
पांच सीट पर भाजपा की हार चिंताजनक
पूरे प्रदेश में भाजपा की लहर सी चली पर राजनांदगांव में छह सीटों में केवल एक सीट पर ही भाजपा एकतरफर परचम लहरा पाई और पांच सीटों पर कब्जा नहीं कर पाए।
संगठन जिले के प्रमुख नेताओं को इन सीटों पर कब्जा जमाने के लिए चुनाव संचालन की जिम्मेदारी दी थी पर इन नेताओं ने जीत हासिल नहीं की। इन सीटों पर बुरी कदर हार हुई है। खबर है कि भाजपा संगठन ने इन सीटों में हुई हार को लेकर चिंता जताई है। यहां भी स्पष्ट है कि चुनाव संचालन की कमान संभालने वाले नेताओं को आगामी दिनों में होेने वाली बैठक में जवाब तो देना होगा।
खबर है कि प्रदेश में सत्ता आने के बाद ये सवालों के घेरे से बच तो गए हैं पर संगठन ने इन्हें चिन्हांकित कर लिया है। खैरागढ़ में तो परिणाम आने के पहले ही कुछ कार्यकर्ताओं पर कार्रवाई भी हो गई। यहां परिणाम के बाद स्पष्ट भी हो गया कि भितरघात करने वाले सक्रिय थे। राजनांदगांव विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस के उन नेताओं की दिक्कत बढ़ी हुई, जिन्हें 5-5 वार्ड का प्रभारी बनाया गया था। इन्हें तो आगामी बैठक में वार्ड और बूथ स्तर पर मिले परिणाम को लेकर अपनी बात रखनी ही होगी ताकि लोकसभा चुनाव के दौरान इसमें सुधार किया जा सके। राजनांदगांव ग्रामीण के नेताओं को भी हार का कारण बताना होगा तभी तो लोकसभा चुनाव के दौरान पार्टी कुछ फेरबदल करेगी।
हार-जीत को लेकर आगामी दिनों में समीक्षा होगी। हार के कारणों को लेकर बात की जाएगी ताकि कारण का पता चल सके और इसमेें सुधार हो सके।





