बिलासपुर। अंग्रेजी माध्यम स्कूल खोलने के खिलाफ दायर जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने शासकीय वकील के अंग्रेजी में बहस करने पर आपत्ति जताई। दरअसल, इस प्रकरण में शासन की तरफ से जवाब प्रस्तुत करने के लिए समय मांगा गया, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया है। अब प्रकरण की सुनवाई चार मार्च को निर्धारित की गई है।
जशपुर जिले के अंकभारती के अध्यक्ष डा.रविंद्र कुमार वर्मा ने हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की है। इसमें राज्य शासन के उस निर्णय को चुनौती दी गई है, जिसमें हिंदी माध्यम स्कूलों के संसाधनों पर ही अंग्रेजी माध्यम स्कूल का संचालन किया जा रहा है। इस मामले में याचिकाकर्ता खुद पैरवी कर रहे हैं। गुस्र्वार को इस प्रकरण की सुनवाई चीफ जस्टिस पीआर रामचंद्र मेनन व जस्टिस पीपी साहू की युगलपीठ में हुई।
इस दौरान शासन के तरफ वकील ने अंग्रेजी में बहस करते हुए कोर्ट से जवाब के लिए समय मांगा। इस पर याचिकाकर्ता ने आपत्ति करते हुए कहा कि अंग्रेजी उन्हें समझ में नहीं आता। लिहाजा, हिंदी में बहस की जाए। इस दौरान कोर्ट ने बताया कि शासन इस मामले में जवाब के लिए समय मांग रहा है। तब याचिकाकर्ता ने आपत्ति जताई और अब जवाब के लिए समय देने का विरोध किया। हालाकि युगलपीठ ने शासन के आग्रह पर मामले की सुनवाई की तारीख बढ़ा दी है। अब इस मामले में 4 मार्च को सुनवाई होगी।
डा.वर्मा ने अपनी याचिका में बताया है कि राज्य शासन ने बड़ी संख्या में अंग्रेजी माध्यम स्कूल खोलने की योजना बनाई है। यह सकारात्मक पहल है और कोई आपत्ति भी नहीं है। लेकिन हिन्दी माध्यम स्कूलों को बंद कर या परिवर्तित कर उसके संसाधनों से स्कूूल खोलने का निर्णय उचित नहीं है। इससे हन्दी माध्यम स्कूलों की गुणवत्ता व विद्यार्थियों पर प्रभाव पड़ेगा। शासन का यह निर्णय किसी भी तरह से वैधानिक नहीं है। बीच सत्र में हिंदी माध्यम स्कूल के शिक्षकों का स्थानांतरण कर दिया गया है। ऐेसे में हिंदी माध्यम स्कूल के बच्चों को कौन पढ़ाएगा। इससे पढ़ाई की गुणवत्ता प्रभावित होगी और विद्यार्थियों का भविष्य अंधकारमय हो जाएगा।
