राजनांदगांव पूर्व प्रधानमंत्री स्व.अटल बिहारी वाजपेयी के जन्म दिवस पर गत दिनों पद्मश्री गोविंदराम निर्मलकर ऑडिटोरियम में कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस अवसर पर रायपुर, दुर्ग, भिलाई, नागपुर आदि जगहों से पधारे कवि व साहित्यकारों ने काव्यपाठ किया। कवि सम्मेलन में सर्व प्रथम रचना पाठ रायपुर से पधारे कवि मीर अली ने अटल जी के समय देश में सड़कों के बिछे जाल, पोखरण के परमाणु विस्फोट सहित कारगिल विजय का कमाल व संयुक्त राष्ट्र संघ में हिन्दी में दिए गए भाषण सहित अन्य पहलुओं को छूते हुए अपनी काव्य रचना पढ़ी। उन्होंने अपनी चर्चित छत्तीसगढ़ी रचना-नंदा जाही का रे…सस्वर पाठ कर खूब वाहवाही पाई। बालोद से पधारे कवि अखिलेश प्रसाद मिश्रा ने अटल बिहारी बाजपेयी को आदरांजलि इन शब्दों में दी-अमन और शांति से सींचा हुआ तुम्हारा ये खूबसूरत चमन है..हे, छत्तीसगढ़ राज्य के निर्माता, तुम्हें शत-शत नमन है। दुर्ग के कवि ओमवीर करण ने कहा- फर्क बहुत है तेरी ओर मेरी तालीम मे.. तूने उस्तादों से सीखा है और मैंने हालातों से। छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के जिला आत्माराम कोशा ने स्व.वाजपेयी को सनातन से जोड़ते हुए कहा- बैरी-दुश्मन चाहे जितना गिरा ले हम पर गाज.. अटल रहा है, अटल रहेगा…अटल सनातन राज…। रायपुर से आए युवा कवि मनोज शुक्ला ने अपने चुम्बकीय चुटकुलों से वातावरण में जहां अटल की गर्मी पैदा की। वहीं अपनी संदेशात्मक कविता से यो कहा- प्रदूषण शहर देते हैं। गांव नहीं देते..कभी सड़क किनारे एक पेड़ लगाओ यारो…। बिजली के खंभे कभी छांव नहीं देते। दुर्ग से पधारे कवि प्रदीप पाण्डे ने-बारूदी माहौल बनाकर वो कहते हैं कि धैर्य रखो..तलवारों से खून लगाकर कहते हैं धैर्य रखो..वाली रचना पढ़ी। जनप्रतिनिधियों ने भी किया जनसमूह को संबोधित इस अवसर को सांसद संतोष पाण्डे, पूर्व सांसद मधुसूदन यादव, खूबचंद पारख, रमेश पटेल, सचिन बघेल, नीलू शर्मा, किशुन यदु व कलेक्टर डोमन सिंह, जिला पंचायत के सीईओ अमित कुमार, निगम आयुक्त अभिषेक गुप्ता, एसडीएम अरुण वर्मा सहित जनप्रतिनिधियों, पार्षदों, साहित्यकारों आदि की उपस्थिति में कवियों ने भारत रत्न माननीय अटल बिहारी वाजपेयी को कृतज्ञता पूर्वक याद किया। राष्ट्र के प्रति उनके किए योगदान को याद कर उनसे प्रेरणा लेने पर जोर दिया।
