सक्ति- हसौद- अंचल में बड़े पैमाने पर महुआ लहान से कच्ची शराब बनाने का कारोबार चल रहा है। अंचलों सहित कई जगह कंजरों के डेरे पर खुलेआम कच्ची शराब बनाकर बेची जा रही है। पुलिस अक्सर यहां छापेमारी करती रहती है मगर एक दो दिन बाद फिर से भट्ठियां शुरू हो जाती हैं।


डेरों पर बन रही कच्ची शराब

सरकार वैधानिक रूप से शराब की दुकानें भले ही बढ़ा रही हों, लेकिन अवैध रूप से भी बड़े पैमाने पर शराब बनाई जा रही है। कच्ची शराब बनाने के ज्यादातर मामले हसौद थाना क्षेत्र के ग्राम धमनी, मल्दा, चिसदा, हसौद, पेंड्री व भातमहुल सहित अन्य डेरों पर मिलते हैं। घरों के अंदर, नदी के किनारे, भी भट्टी से शराब बनाई जा रही है। वहीं आस-पास गांव में शराब बनाकर पैकिंग करके बेची जाती है। यहां बता दें कि घरों के अंदर के डेरे सहित कई दुर्गम इलाकों में कच्ची शराब बनाई जाती है।
लगातार नहीं होती कार्रवाई

कहीं न कहीं आबकारी विभाग में अमले की कमी और पुलिस की लापरवाही से यह कारोबार लगातार फल- फूल रहा है। जब शराब से कोई मौत होती है या फिर टारगेट पूरा करने के लिए अवैध व कच्ची शराब पकडऩे व नष्ट करने का दिखावे के लिए अभियान जरूर चलाया जाता है, मगर मामला ठंडा पड़ते ही अवैध शराब की निगरानी ढीली कर दी जाती है। जिससे फिर से अवैध शराब गांव-गांव में बननी शुरु हो जाती है।
ज्यादा नशीली बनाने के लिए मिला रहे जहर

कच्ची शराब महुआ लहन, गुड़ को सड़ाकर उसमें नौसादर मिलाकर कच्ची शराब बनाई जाती है। महुआ या गुड़ जब सड़ जाता है तो इसे बड़े बर्तन में भट्टी पर पकने रख देते हैं। एक नली से बर्तन से भाप बोतल में एकत्र की जाती है यह भाप ठंडी होने पर तरल रूप में आ जाती है। शराब में नशा बढ़ाने के लिए उसमें यूरिया, ऑक्सीटोसिन, बेसरम मिलाते हैं, जो जहरीला होता है। चिकित्सकों के अनुसार केमिकल कम ज्यादा होने पर शराब जहरीली हो जाती है, जो जान भी ले सकती है। 

By kgnews

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