जीएसटी रिटर्न की अंतिम तारीख निकली, प्रदेश के 40% कारोबारियों ने रिटर्न नहीं किया

इंदौर
जीएसटी के वार्षिक रिटर्न दाखिल करने की मियाद 28 फरवरी को बीत गई। अब भी मध्य प्रदेश में करीब 40 प्रतिशत व्यापारी ऐसे हैं जो रिटर्न दाखिल नहीं कर सके। कारोबारियों के साथ चार्टर्ड अकाउंटेंट और कर सलाहकार लगातार मांग कर रहे थे कि रिटर्न दाखिल करने की तारीख आगे बढ़ाई जाए। इन्हें भरोसा भी था कि अंतिम तारीख आगे बढ़ेगी। उम्मीद से उलट मंगलवार तक जीएसटी काउंसिल की ओर से ऐसा कोई ऐलान नहीं हुआ। अब जीएसटी काउंसिल के रवैये से नाराजगी भड़क गई है। कारोबारियों के साथ टैक्स पेशेवरों ने इसे बिना वजह परेशान करने का सरकारी रवैया करार देते हुए विरोध में मोर्चा खोलने की चेतावनी दे दी है। सवाल इसलिए भी उठाया जा रहा है कि तारीख बढ़ाने से सरकार के राजस्व को कोई नुकसान नहीं होता, लेकिन कारोबारियों का राहत जरूर मिल जाती।

प्रदेश में करीब 4 लाख व्यवसायी जीएसटी के अंतर्गत पंजीकृत हैं। जीएसटी प्रणाली में हर व्यवसायी को मासिक रिटर्न के साथ टैक्स चुकाना होता है। वार्षिक रिटर्न में सालभर के चुकाए गए रिटर्न का ब्यौरा दाखिल होता है। दो करोड़ रुपये से कम वार्षिक टर्नओवर वाले व्यापारियों के लिए जीएसटी का वार्षिक रिटर्न जमा करना ऐच्छिक है। जबकि इससे ज्यादा टर्नओवर वाले व्यापारी के लिए अनिवार्य। मप्र टैक्स ला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अश्विन लखोटिया के अनुसार कम से कम सवा लाख व्यापारी हैं जो टर्न ओवर की इस सीमा से ऊपर हैं और अनिवार्य रिटर्न के दायरे में आते हैं।

इंदौर जैसे शहर में ही मुश्किल से 50 से 60 प्रतिशत व्यापारी ही आज की स्थिति में वार्षिक रिटर्न दाखिल कर सके हैं। छोटे शहरों और कस्बों में यह प्रतिशत और भी कम होगा। इसके पीछे किसी की लापरवाही नहीं बल्कि तार्किक कारण है। दरअसल, अब तक आयकर आडिट और रिटर्न दाखिल करने की प्रक्रिया ही चल रही है।

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अब लेट फीस का बोझ, एकजुट होकर करेंगे विरोध

बुधवार से जीएसटी के वार्षिक रिटर्न की अव्यवहारिक तारीखों के खिलाफ व्यापारियों और पेशेवरों का विरोध शुरू हो सकता है। तमाम कारोबारियों की शिकायत है कि वे चाहते तो भी जीएसटी वार्षिक रिटर्न नहीं दाखिल कर सकते थे क्योंकि सीए और कर सलाहकार अब तक आयकर की औपचारिकताओं में ही व्यस्त हैं। इसके बावजूद अब कारोबारी की जेब पर लेट फीस का बोझ आएगा। बुधवार को केंद्र और राज्य जीएसटी कमिश्नरों को मिलकर प्रतिनिधिमंडल जीएसटी काउंसिल तक अपना विरोध पहुंचाने की कोशिश करेगा।

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